अमरीका की सामरिक आस

अमरीका भले ही भारत को 126 जंगी जहाज़ बेचने की होड़ से हार कर बाहर हो गया हो लेकिन वो अब भी यही मानता है कि भारत के साथ उसकी सामरिक जुगलबंदी भविष्य में जम सकती है.

अमरीका के रक्षा विभाग की ओर से देश की संसद को सौंपी गई एक रिपोर्ट में भविष्य और दोनों देशों के बीच और गहरे रिश्तों और गहन साझेदारी की बात भी कही गई है.

इस रिपोर्ट में भारत और रूस की ओर से मिलकर विकसित किए जा रहे पांचवीं पीढ़ी के जंगी जहाज़ का उल्लेख किया गया है और कहा गया है कि अमरीका भारत को अपने सर्वाधिक विकसित जॉइंट स्ट्राइक फाईटर से जुड़ी जानकारियाँ मुहैय्या कराने के लिए तैयार है.

इस रिपोर्ट में कहा गया है, "अगर भारत रूचि दिखाए तो अमरीका भारत को इस जहाज़ के बारे में जानकारी दे सकता है साथ ही वो इस जहाज़ से जुड़ी ज़रूरतों (आधारभूत ढांचा, सुरक्षा आदि) के बारे ने भी भारत को बता सकता है."

अमरीका ने भारत को पहले भी संकेत दिए थे कि वो दस अरब डॉलर के जंगी जहाज़ों को बेचने के सौदे से बाहर होने के बाद भी भारत को कुछ और उन्नत जहाज़ उपलब्ध करा सकता है.

हालांकि भारत ने अभी तक अमरीका के लड़ाकों जहाज़ों से जुड़े प्रस्तावों में कोई खास रूचि नहीं दिखाई है.

रूस और इसराइल को तरजीह

इसके अलावा इस रिपोर्ट में अमरीकी संसद को इस बात का ध्यान दिलाया गया है कि भारत रक्षा उत्पादों के मामले में अपने निजी क्षेत्र के उद्योगों को विकसित करना चाहता है और इसके लिए सर्वश्रेष्ठ तकनीकें चाहता है.

इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है, "अमरीका चाहता है कि इस काम में भारत के साथ रक्षा उद्योगों में अपनी भागीदारी बढ़ाए. साथ ही साथ वो भारत के साथ मिल कर शोध और विकास का काम करे."

रक्षा क्षेत्र में अब तक भारत का अमरीका के प्रति रुख उस तरह का नहीं रहा है जिस तरह का अमरीका चाहता है.

हालांकि भारत अमरीका से हाल के कुछ दिनों में छह अरब डॉलर के सामरिक सौदे कर चुका है लेकिन अभी भी भारत अमरीका के ऊपर रूस और इसराइल को तरजीह देता है.

साल 2010 में दुनिया में हथियारों को आयात करने वाले देशों में भारत का नंबर पहला था.

अमरीकी संसद की एक दूसरी रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2003 से लेकर 2010 के बीच भारत ने 13 अरब डॉलर से ज़्यादा के हथियार खरीदे.

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