'आइएमएफ़ के आर्थिक स्रोत मज़बूत किए जाएँगे'

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फ़्रांस के कान शहर में जी-20 देशों के सम्मेलन के दौरान बीस ताक़तवर देशों ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में योगदान देने का संकल्प लिया है.

इन देशों ने कहा है कि आर्थिक प्रगति को सुगम बनाने के लिए ये फ़ैसला किया गया है, लेकिन इसके बारे में और ब्यौरा अगले साल फ़रवरी में जारी किया जाएगा.

बीबीसी के आर्थिक विषयों के विश्लेषक एंड्रू वॉकर का कहना है अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के आर्थिक स्रोत बढ़ाने पर सहमति तो हुई है लेकिन इस बात पर कोई सहमति नहीं बन पाई कि आइएमएफ़ को कितने धन की आवश्यकता है.

ये सम्मेलन ऐसे वक़्त में हुआ जब यूरोप के देश आर्थिक संकट से गुज़र रहे हैं.

ख़ास तौर पर ग्रीस की ख़स्ता आर्थिक स्थिति चिंता का कारण बनी हुई है.

चेतावनी

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Image caption जी देशों का सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब यूरोप आर्थिक संकट में है.

इस मुद्दे पर जी-20 देशों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष होसे मैनुअल बर्रोसो ने ख़बरदार किया कि आख़िरकार ग्रीस को यूरोज़ोन छोड़ना पड़ सकता है.

उन्होंने उम्मीद जताई कि यूरो को अपनी मुद्रा बनाए रखने के लिए ग्रीस राष्ट्रीय सहमति की सरकार बना सकता है.

सम्मेलन के समापन भाषण में फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोला सारकोज़ी ने आर्थिक संकट से उबारने के लिए इटली की कोशिशों की सराहना की.

उन्होंने कहा कि यूरोज़ोन और दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए इटली एक महत्वपूर्ण देश है.

गुरूवार को फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोला सारकोज़ी ने चेतावनी दी थी कि अगर यूरो मुद्रा पर कोई संकट आता है तो इसका असर यूरोप पर भी पड़ेगा.

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने यूरोज़ोन के संकट के बारे में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि ये नहीं मानना चाहिए कि तीन साल से चल रहा यूरोज़ोन का आर्थिक संकट दो दिन के सम्मेलन से हल हो सकता है.

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