ऑस्ट्रेलिया में कार्बन टैक्स को संसद की मंज़ूरी

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Image caption प्रति व्यक्ति के हिसाब से ऑस्ट्रेलिया विकसित देशों में सर्वाधिक प्रदूषण फैलाने वाला देश है

ऑस्ट्रेलिया की संसद ने वर्षों की राजनीतिक खींचतान के बाद प्रदूषण पर एक विवादास्पद क़ानून को मंज़ूरी दे दी है.

देश में सर्वाधिक प्रदूषण फैलाने वाली 500 कंपनियों को 'स्वच्छ ऊर्जा विधेयक' के तहत अगले साल एक जुलाई से कार्बन टैक्स देना होगा.

संसद में इस विधेयक के पास होने को प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड की जीत की तरह देखा जा रहा है. उन्होंने इस योजना को पूरी सहमति दी थी.

पर्यावरणविदों ने आम तौर पर इस योजना का समर्थन किया है मगर इसके विरोध में व्यापक प्रदर्शन भी हुए हैं.

विपक्षी पार्टियों का कहना है कि इससे नौकरियों में कटौती होगी और लोगों की आजीविका का ख़र्च भी बढ़ेगा. उनका कहना है कि चुनाव में अगर वे जीते तो बाद में वे ये क़ानून वापस ले लेंगे.

इधर सरकार ने जलवायु परिवर्तन से जुड़ी जो नीतियाँ बनाई हैं उसमें इसे प्रमुखता से रखा था.

मामूली बहुमत

संसद के निचले सदन में ये प्रस्ताव पिछले महीने 72 के मुक़ाबले 74 मतों के मामूली बहुमत से पारित हुआ था.

ऊपरी सदन में भी मतदान काफ़ी नज़दीक़ी रहा जहाँ इसके समर्थन में 34 और विरोध में 32 मत पड़े.

सरकार को भरोसा था कि ग्रीन पार्टी के सदस्य उनका समर्थन करेंगे.

इसके बाद उप प्रधानमंत्री वेन स्वॉन ने कहा कि ये आशावादियों की जीत है.

ऑस्ट्रेलिया में प्रदूषण पर लगाम लगाने की योजनाओं पर कई वर्षों से बहस होती रही है.

पूर्व प्रधानमंत्री केविन रड तो 2007 में कार्बन टैक्स को मुख्य चुनावी मुद्दा बनाकर ही चुनाव जीतकर आए थे.

मगर उनकी योजनाएँ राजनीतिक खींचतान का शिकार हो गईं और विश्लेषक मानते हैं कि ये क़ानून नहीं पारित करवा पाना ही उनके सत्ता से जाने की मुख्य वजह बना.

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