इटली अपने सारे ऋण चुका सकेगा: राष्ट्रपति नेपोलितानो

  • 10 नवंबर 2011
Image caption बर्लुस्कोनी इटली की राजनीति में पहली बार अलग थलग पड़ गए हैं.

इटली के राष्ट्रपति जॉर्जियो नैपोलितानो ने दुनिया भर के वित्तीय बाज़ारों को आश्वस्त किया है कि इटली अपने सारे ऋण चुका सकेगा.

इटली में वित्तीय संकट बढ़ गया है क्योंकि सरकारी बांडों पर ब्याज़ दर बढ़ता ही जा रहा है और अब ये ब्याज़ दर सात प्रतिशत तक पहुंच गया है.

जब किसी देश के सरकारी बांडों पर ब्याज़ दर इस स्तर तक पहुंचता है तो अर्थव्यवस्था की हालत गंभीर मानी जाती है. आयरलैंड, पुर्तगाल और ग्रीस में इससे कम ब्याज़ दरों पर हालात इतने ख़राब हो गए थे कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मदद लेनी पड़ी थी.

राष्ट्रपति नेपोलितानो ने कहा कि इटली जल्दी ही एक ऐसा क़ानून पारित करेगा जिससे वित्तीय मामलों में स्थायित्व आ सकेगा.

इस क़ानून के पारित होते ही इटली के प्रधानमंत्री बर्लुस्कोनी अपने पद से इस्तीफ़ा दे देंगे. राष्ट्रपति ने पूर्व यूरोपीय आयुक्त मारियो मांटी को आजीवन सीनेटर बनाया है और माना जा रहा है कि यह फ़ैसला उनके अंतरिम प्रधानमंत्री बनने की दिशा में उठाया गया पहला कदम है.

इस बीच प्रधानमंत्री बर्लुस्कोनी ने साफ किया है कि अगर नए सिरे से चुनाव होते हैं तो वो चुनाव नहीं लड़ेंगे. बर्लुस्कोनी पहले चाहते थे कि चुनाव हों लेकिन विपक्ष किसी और के नेतृत्व में गठबंधन सरकार बनाने के पक्ष में था ताकि ऋण संकट से निपटा जा सके.

इससे पहले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) की प्रमुख क्रिस्टीन लैगार्ड ने चेतावनी दी है कि यूरोप की आर्थिक समस्याओं के कारण दुनिया भर की अर्थव्यवस्था को 'एक दशक का नुक़सान' हो सकता है. उनका ये भी कहना है कि यूरोज़ोन की समस्याओं से एशिया भी अछूता नहीं रहेगा.

लैगार्ड ने ये बात चीन की अपनी दो दिन की यात्रा की शुरुआत में कही.

माना जा रहा है कि उनकी यात्रा में बातचीत का केंद्र यूरोप का कर्ज़ संकट है.

क्रिस्टीन लैगार्ड का कहना था कि ग्रीस को कर्ज़ संकट से उबारने के लिए दिया गया शुरुआती आर्थिक पैकेज सही दिशा में क़दम है लेकिन संकट अब भी टला नहीं है

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