इतिहास के पन्नों में 13 नवंबर

  • 13 नवंबर 2011

इतिहास के पन्नों को उठा कर देखें तो 13 नवंबर के दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटी थीं.

1985: कोलंबिया में ज्वालामुखी फटने से हज़ारों मरे

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Image caption ये पहला मौका नहीं था जब कोलंबिया में ज्वालामुखी फटने से इतने लोगों की मौत हुई थी

पूर्वी कोलंबिया में वर्ष 1985 में फटे ज्वालामुखी से करीब 23,000 लोग मारे गए थे. इससे कई इलाकों में भारी तबाही मची थी. चारों ओर राख ही राख नज़र आ रही थी. सबसे ज़्यादा नुकसान तोलिमा प्रांत के दूसरे बड़े शहर आर्मेरो में हुआ. ये शहर कोलंबिया की राजधानी बोगोटा से 50 मील दूर है.

वर्ष 1902 में कैरिबियाई द्वीप मार्टिनिक के पर्वत मॉंट पेली के फटने के बाद ये दूसरी बड़ी घटना थी. उस धमाके में 29,000 लोग मारे गए थे.

वर्ष 1985 में ज्वालामुखी फटने के बाद ये पर्वत नेवाडो डेल रुइज कई सालों तक सक्रिय रहा. वर्ष 1991 और 1992 में फिर ज्वालामुखी में विस्फोट हुआ था.

ये पहला मौका नहीं था जब कोलंबिया में ज्वालामुखी फटने से इतने लोगों की मौत हुई थी. इससे पहले वर्ष 1595 में विस्फोट के बाद पर्वत के चारों ओर कीचड़ फैल गया था. एक और विस्फ़ोट वर्ष 1845 में हुआ जिसमें करीब 1,000 लोग मारे गए थे.

करीब 50 सालों के बाद लोगों ने आर्मेरो शहर को उसी सूखे कीचड़ के ऊपर बनाना शुरू किया. वर्ष 1985 की तबाही के बाद सरकार ने दबे हुए शहर को पवित्र धरती घोषित कर दिया.

1995: एक्सटसी की गोली से लड़की बेहोशी में

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Image caption एसेक्स के लैचिंगटन की रहनी वाली लिया बेट्स एक्सटसी की गोली खाने के चार घंटे बाद गिर पड़ीं

इसी साल हुई एक घटना में 18 साल की एक लड़की एक्सटसी की गोली खाने के बाद बेहोश हो गई थी.

एसेक्स के लैचिंगटन की रहनी वाली लिया बेट्स एक्सटसी की गोली खाने के चार घंटे बाद गिर पड़ीं. पुलिस का मानना था कि ये गोली दूषित थी.

तीन दिन बाद लिया बेट्स की मौत हो गई. बेहोश होने के बाद उन्हें दोबारा कभी होश नहीं आया.

इसका असर ये हुआ कि उनके माता-पिता ड्रग-विरोधी अभियानकर्ता बन गए. जाँच पड़ताल के बाद पता चला कि लिया की मौत सीधे तौर पर एक्सटेसी की गोली से नहीं हुई थी, बल्कि गोली के असर को कम करने के लिए पिया गया पानी ज़िम्मेदार था.

1971: अमरीकी विमान ने मंगल ग्रह के चक्कर लगाए

दिन वर्ष 1971 में अमरीकी अंतरिक्ष विमान मैरिनर-9 पहला विमान बना जिसने एक दूसरे ग्रह के चक्कर लगाए हों.

करीब एक महीने बाद वैज्ञानिकों को मंगल ग्रह की साफ़ तस्वीरें दिखाई दी थीं.

इस ग्रह पर बड़े ज्वालामुखी थे. एक ज्वालामुखी की उँचाई धरती पर मौजूद ज्वालामुखी से दोगुना थी. वहाँ चौड़ी नहरें थीं जिससे ऐसा अंदाज़ा लगाया गया कि मंगल ग्रह पर पानी मौजूद हो.

मैरिनर-2 पर मौजूद कैमरों ने 7,329 तस्वीरें धरती पर भेजीं. 27 अक्टूबर 1972 को मैरिनर-2 से संपर्क खत्म हो गया.

मैरिनर-2 के कुछ ही दिन बाद सोवियत विमान मार्स-2 मंगल ग्रह वापस लौटा, लेकिन 20 सेकेंडों के बाद ही उसमें खराबी आ गई.

वर्ष 1976 में मंगल ग्रह की धरती पर पहली बार वाइकिंग-1 विमान उतरा.

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