अरब लीग ने लगाए सीरिया पर सशर्त प्रतिबंध

  • 12 नवंबर 2011
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Image caption सीरिया पर लगाए गए प्रतिबंधों को कड़ा कदम बताया जा रहा है.

अरब लीग ने अपने काम-काज में सीरिया की भागेदारी पर रोक लगा दी है और कहा है कि ये प्रतिबंध तब तक लागू रहेंगे जब तक सीरिया शांति प्रस्ताव को नहीं मानता.

शनिवार को मिस्र की राजधानी क़ाहिरा में बुलाई गई एक आपात बैठक में अरब लीग देशों ने यह कड़ा कदम उठाया है.

साथ ही यह घोषणा भी की गई है कि बहुत जल्दी सीरिया की सरकार पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए जाएँगे.

लीग ने सभी सदस्य देशों से कहा है कि वे सीरिया की राजधानी दमिश्क़ से अपने राजदूत भी वापस बुला लें.

इस आपात बैठक के बाद जारी किए गए एक बयान में सीरिया की सेना से प्रदर्शनकारियों पर की जा रही हिंसा को रोकने का भी आग्रह किया गया है.

बैठक के बाद हुए मतदान में 18 देशों ने इसके पक्ष में मत डाले. जहां इराक़ ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया वहीँ लेबनान और यमन ने इस प्रस्ताव के विरोध में में मत डाले.

दो हफ़्ते पहले अरब लीग के ज़रिए तैयार किए गए शांति समझौता लागू न हो पाने की वजह से अरब लीग पर इस बात के लिए भारी दबाब था कि सीरिया को अरब लीग की सदस्यता से निलंबित कर दिया जाए.

हिंसा बरक़रार

मानवाधिकारों पर नज़र रखने वाली संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि समझौते की घोषणा होने के बाद से भी सैकड़ों की तादाद में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारी मारे जा चुके हैं.

सीरियाई सेना पर आरोप है कि वो होम्स शहर में अत्याचार और अवैध हत्याओं में शामिल है.

इस संस्था ने अरब लीग से सीरिया को अपनी सदस्यता से निलंबित करने की और वहाँ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की कार्रवाई के समर्थन की अपील की थी.

हांलाकि अरब लीग के देश भी इस मसले पर अब तक बटे हुए थे.

वो इस बात को लेकर पसोपेश की स्थिति में थे कि अरब लीग की सदस्यता से सीरिया को निलंबित किए जाने पर क्या कोई बदलाव होगा.

इस बीच सीरिया की सरकार का दावा रहा है कि वो इस शांति समझौते को लागू कर रही है.

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