'विशेषाधिकार क़ानून पर चिंताओं का समाधान संभव'

  • 14 नवंबर 2011
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Image caption उमर अब्दुल्ला ने कहा कि वे सेना विशेषाधिकार क़ानून पर पहले चरण की बातचीत के लिए दिल्ली में हैं

भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने कहा है कि सशस्त्र बल विशेषाधिकार क़ानून के विषय में उनके और सेना के सार्वजनिक कथन के बीच की दूरी को घटाने की कोशिश जारी है.

उमर अब्दुल्लाह ने कुछ दिन पहले मांग की थी कि बदली परिस्थितियों में राज्य के कुछ हिस्सों से सशस्त्र बल विशेषाधिकार क़ानून को हटाया जाना चाहिए.

दिल्ली में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने गृह मंत्री पी चिदंबरम से बातचीत के बाद पत्रकारों को बताया, "मैं इस मुद्दे पर पहले चरण की बातचीत में प्रधानमत्री, रक्षा मंत्री और गृह मंत्री से मिल चुका हूँ और बाद में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति के चौथे सदस्य वित्त मंत्री से भी मिलूँगा. यदि ज़रूरी हुआ तो चर्चा आगे भी होगी."

उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि दोनों पक्षों की चिंताओं का समाधान हो सकता है - सशस्त्र बलकी चिंता और हमारी इच्छा - जो लगभग एक साल पहले सुरक्षा मामलों पर कैबिनेट समिति की सिफ़ारिशों के अनुरूप है."

अलगाववादी संगठन हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस की आपत्तियों पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उमर अब्दुल्लाह ने कहा कि राज्य के जिन हिस्सों से सशस्त्र बलविशेषाधिकार क़ानून को हटाने पर चर्चा हो रही है, उन क्षेत्रों में तो सशस्त्र बलपहले ही नहीं है.

उन्होंने एक और सवाल के जवाब में कहा कि वे किसी भी मुद्दे से ध्यान पलटने की कोशिश नहीं कर रहे हैं और वे 'राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर कोई समझौता नहीं' करेंगे.

उन्होंने कहा कि जब से उन्होंने मुख्यमंत्री पद का कार्यभार संभाला है तब से ही वे सशस्त्र बलविशेषाधिकार क़ानून के मुद्दे पर बात कर रहे हैं.

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