अरब लीग से निलंबन पर सीरिया का रुख़ कड़ा

विदेश मंत्री वालिद अल-मुआलेम इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption विदेश मंत्री वालिद अल-मुआलेम ने कहा, "सीरिया लीबिया नहीं है. लीबिया दोहराया नहीं जाएगा.''

सीरिया के विदेश मंत्री वालिद अल-मुआलेम ने अरब लीग से निलंबित किए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.

इसे 'ख़तरनाक क़दम' बताते हुए उन्होंने कहा कि अमरीका के उकसाए जाने पर किया गया यह एक नाजायज़ फ़ैसला है.

उन्होंने कहा कि सीरिया अपने कड़े रुख़ से पीछे नहीं हटेगा और उसके ख़िलाफ़ किए जा रहे सभी 'षडयंत्र' विफल होंगे.

अरब लीग ने शनिवार को महीनों के विरोध पर सीरिया के दमन के चलते उसकी सदस्यता निलंबित कर दी थी.

बुधवार को सीरिया पर चर्चा के लिए अरब लीग एक और बैठक कर रहा है.

इस बीच ब्रसल्स में हुई यूरोपीय नेताओं की एक बैठक में सीरिया के खिलाफ़ प्रतिबंधों को और कड़ा किए जाने पर सहमति बन गई है.

इस बैठक में तय किया गया है कि यूरोपीय निवेश बैंक की ओर से सीरिया को दिए जाने वाले कर्ज़ पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा और उन 18 सीरियाई लोगों पर वीज़ा प्रतिबंध लगाए जाएंगे जिनपर प्रदर्शकारियों के खिलाफ़ हिंसा का आरोप है.

इसके साथ काली सूची में डाले गए सीरियाई राष्ट्रपति बशर-अल असद के नज़दीकियों की संख्या 74 तक पहुंच गई है.

हमलों पर माफी़

एक संवाददाता सम्मेलन में मुआलेम ने कहा, "आज सीरिया में एक संकट है और वो अपने मज़बूत रुख़ की क़ीमत चुका रहा है. सीरिया पीछ नहीं हटेगा और मज़बूती से उभरेगा और सीरिया के ख़िलाफ षडयंत्र विफल होंगे."

दमिश्क में विदेशी दूतावासों पर राष्ट्रपति बशर अल असद के वफ़ादारों के हमलों पर उन्होंने माफ़ी मांगी.

सीरिया की राजधानी में एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा, "यह महत्वपूर्ण है कि यह दोहराया न जाए. दूतावासों की सुरक्षा हमारी ज़िम्मेदारियों का हिस्सा है. इसलिए जो हुआ, मैं उसके लिए माफ़ी माँगता हूं."

शनिवार को फ्रांस, क़तर, सऊदी अरब और तुर्की के दूतावासों पर हमला किया गया था.

क़तर और सऊदी अरब उन अरब देशों में से हैं, जिन्होंने सीरिया को अरब लीग से निलंबित करने के लिए मतदान किया था.

'सीरिया लीबिया नहीं'

मुआलेम ने सीरिया पर किसी भी पश्चिमी सैन्य हस्तक्षेप की संभावना को भी नकारा.

उन्होंने कहा, "सीरिया लीबिया नहीं है. लीबिया दोहराया नहीं जाएगा. सीरिया में जो रहा है वो लीबिया से अलग है और सीरिया के लोगों को चिंता नहीं करनी चाहिए."

'पद छोड़ देना चाहिए'

इस बीच जॉर्डन के शाह अब्दुल्लाह ने कहा है कि सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद को देशहित में अपना पद छोड़ देना चाहिए.

बीबीसी के साथ एक विशेष इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अगर वे राष्ट्रपति असद की जगह होते, तो अपना पद छोड़ चुके होते.

सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर सीरिया की कार्रवाई का जॉर्डन शुरू से विरोध करता रहा है.

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक अरब लीग से निलंबन के बीच जॉर्डन के शाह अब्दुल्लाह का ये बयान सीरिया के प्रति अरब देशों के कड़े होते रुख़ को दिखाता है.

सीरिया के लिए ये बढ़ती मुश्किलें उसके पूरी तरह अलग-थलग पड़ जाने का संकेत है.

संबंधित समाचार