'कब्ज़ा करो' प्रदर्शनकारियों को हटाना सही: अदालत

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Image caption न्यूयॉर्क की अदालत ने कहा कि प्रदर्शन तो कर सकते हैं लेकिन तंबू लगाकर शिविर नहीं बना सकते

न्यूयॉर्क की एक अदालत ने 'वॉल स्ट्रीट पर कब्ज़ा करो' लहर के प्रदर्शनकारियों को मंगलवार तड़के न्यूयॉर्क के पार्क से हटाए जाने को सही ठहराया है.

जज ने आदेश सुनाया कि प्रदर्शनकारी पार्क में दोबारा जा सकते हैं लेकिन वे वहाँ पर तंबू लगाकर शिविर नहीं बना सकते.

ग़ौरतलब है कि ब्रिटेन में लंदन में प्रशासन ने सेंट पॉल कैथेड्रल के बाहर हो रहे इसी तरह के प्रदर्शनों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई दोबारा शुरु की है.

तंबू नहीं लगाने दिया गया

मंगलवार को जब सैकड़ों प्रदर्शनकारी पार्क में फिर जमा होने लगे तो उन्हें तंबू नहीं लगाने दिया गया और जेनरेटर का इस्तेमाल भी नहीं करने दिया गया.

पुलिस ने लगभग 200 प्रदर्शनकारियों को तड़के ही हिरासत में ले लिया था. ये लोग सितंबर से बड़े उद्योग घरानों के कथित लोभ और अमरीकी समाज में पूँजीवाद के कारण बढ़ती असमानता के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे थे.

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Image caption अधिकारियों का कहना है कि ओकलैंड शिविर को हिंसा की आशंका के चलते खाली कराया गया.

मंगलवार को अदालत में प्रदर्शनकारियों के वकीलों ने तर्क दिया था कि प्रशासन को सितंबर से जमा हुए प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने से पहले न्यायलय का आदेश लेना चाहिए था.

'जो प्रदर्शन नहीं कर रहे, उनके भी अधिकार हैं'

न्यूयॉर्क के मेयर माइकल ब्लूमबर्ग ने कहा है कि ये क़दम इसलिए उठाया गया क्योंकि इससे सुरक्षा और जनता के लिए ख़तरा पैदा हो सकता था.

जब न्यायिक आदेश आया और प्रदर्शनकारी दोबारा पार्क में एकत्र होने शुरु हुए तो पुलिस ने कहा कि कोई आधाकारिक कर्फ़्यू नहीं है लेकिन प्रदर्शनकारियों को पार्क में सोने की इजाज़त नहीं होगी.

इसके बाद बड़े बस्ते और बिस्तरबंद लिए प्रदर्शनकारियों को पार्क में दाख़िल नहीं होने दिया गया.

एक प्रदर्शनकारी ने बीबीसी को बताया, "चाहे न्यायिक फ़ैसला जो भी हो लेकिन हमें प्रदर्शन करने का हक़ है. ये हमारा शहर है. और ये पार्क पिछले दो महीने से हमारा घर है. पूरा विश्व ये देखने का इंतज़ार कर रहा है कि यहाँ क्या होता है."

न्यायालय के आदेश के बाद मेयर ब्लूमबर्ग ने कहा कि प्रदर्शनकारियों के अधिकारों का जितना महत्व है, उतना ही उनके अधिकारों का भी महत्व है जो प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं.

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