शक न रहे, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अहम भूमिका निभाएँगे: ओबामा

  • 17 नवंबर 2011
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Image caption ओबामा ने कहा अमरीकी सैन्य कटौती एशिया-प्रशांत क्षेत्र की कीमत पर नहीं होगी

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि किसी को शक नहीं होना चाहिए कि 21वीं सदी में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के भविष्य में अमरीका अहम भूमिका निभाएगा.

ऑस्ट्रेलिया की यात्रा पर गए राष्ट्रपति ओबामा ने कहा है कि अमरीका एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाएगा. बुधवार को घोषणा की गई थी अमरीका उत्तरी ऑस्ट्रेलिया में अपने लड़ाकू विमान और 2500 सैनिक तैनात करेगा.

उन्होंने ये भी कहा है कि अमरीकी हितों के लिए इस क्षेत्र के महत्व को देखते हुए अमरीका ये मंशा ज़ाहिर कर रहा है और अमरीका के सैन्य ख़र्च में कमी एशिया-प्रशांत क्षेत्र की कीमत पर नहीं होगी.

चीन ने ऐसे क़दमों पर सवाल उठाया है और पर्यवेक्षकों का कहना है कि ये क़दम क्षेत्र में चीन के बढ़ रहे प्रभाव को देखते हुए उठाए जा रहे हैं.

'एशिया तय करेगा - संघर्ष या सहयोग'

केनबेरा में ऑस्ट्रेलियाई संसद को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ओबामा ने चीन के साथ सहयोग पर बल दिया लेकिन ये भी कहा, "अमरीका प्रशांत (महासागर) में बड़ी ताकत रहा है और आगे भी रहना चाहता है."

ओबामा ने कहा कि अपने आकार, संसाधन और हाल के वर्षों के आर्थिक विकास के कारण एशिया-प्रशांत क्षेत्र विश्व स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है.

उनका कहना था, "विश्व की अधिकतर परमाणु ताकतों और दुनिया की लगभग आधी जनसंख्या के साथ एशिया तय करेगा कि इस सदी में संघर्ष होता है या फिर सहयोग, बिना कारण कष्ट सहना पड़ता है या मानवता प्रगति करती है... अमरीका इस क्षेत्र के भविष्य में पहले से बड़ी और दीर्घकालीन भूमिका निभाएगा और मूल सिद्धांतों का पालन करते हुए अपने सहयोगियों और दोस्तों के साथ सहयोग करेगा."

चीन पर बोलते हुए ओबामा ने कहा, "हमने देखा है कि चीन सहयोगी हो सकता है, फिर वो कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव घटाने की बात हो या फिर अप्रसार का मुद्दा. हम चीन के साथ सहयोग के और अवसर चाहते हैं. इसमें हमारी सेनाओं के बीच ज़्यादा संवाद शामिल है ताकि ग़लतफ़हमी के बचा जाए और समझदारी बढ़ाई जाए."

लेकिन इसी के साथ चीन की नीतियो पर बोलते हुए राष्ट्रपति ओबामा ने कहा, "हम ये सब उस समय बोल रहे हैं जब हम चीन से खुलकर अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने और चीनी लोगों के सार्वभौमिक मानवाधिकारों का सम्मान करने पर बात कर रहे हैं."

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