इतिहास के पन्नों में 18 नवंबर

इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो 18 नवंबर के दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटीं थीं.

1989: बुल्ग़ारिया में सुधार के लिए विरोध प्रदर्शन

Image caption लगभग 35 वर्षों तक बुल्ग़ारिया पर शासन करने वाले टोडोर ज़िवकोव को सत्ता छोड़नी पड़ी.

वर्ष 1989 में आज ही के दिन लगभग 50 हज़ार लोगों ने बुल्ग़ारिया के शहर सोफ़िया में राजनीतिक सुधार की मांग को लेकर सड़कों पर विरोध प्रदर्शन किया था.

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बुल्ग़ारिया के इतिहास में होने वाला ये सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन था.

प्रदर्शनकारी अपने हाथों में तख़्ते लिए हुए थे जिसमें लिखा था, ''अब हम प्रजातंत्र चाहते हैं.''

लगभग 35 वर्षों से शासन कर रहे कम्युनिस्ट नेता टोडोर ज़िवकोव के सत्ता से हटाए जाने के सिर्फ़ आठ दिन बाद ये विरोध प्रदर्शन हुए थे.

सोवियत संघ के विघटन के बाद पूर्वी यूरोप के कई देशों में इस तरह के विरोध प्रदर्शन हुए थे.

ज़िवकोव को उसी साल दिसंबर में बुल्ग़ारिया की कम्युनिस्ट पार्टी से निस्कासित कर दिया गया और फिर जनवरी 1990 में उन्हें नज़रबंद कर दिया गया.

वर्ष 1992 में उन्हें ग़बन का दोषी क़रार देते हुए सात साल की सज़ा सुनाई गई थी.

1978: अमरीका में 914 लोगों ने सामूहिक आत्महत्या की

दक्षिणी अमरीका के गयाना शहर में 18 नवंबर 1978 को 276 बच्चों समेत 914 लोगों ने सामूहिक आत्महत्या कर ली थी.

ये सभी लोग पीपुल्स टेंपल क्रिस्चियन चर्च के सदस्य थे और ज़्यादा तर लोगों की मौत सायनाइड ख़ाने से हुई थी. उन लोगों ने कोल्ड ड्रिंक में सायनाइड मिलाकर पी लिया था.

लेकिन इस संगठन के प्रमुख जिम जोंस की दांयी कन्पट्टी पर गोली के निशान पाए गए थे और ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि उन्होंने ख़ुद को गोली मार ली थी.

इस घटना के एक साल पहले 1977 में इस संगठन पर कर चोरी के आरोप लगे थे और इसकी जांच चल रही थी.

इस कारण संगठन के लगभग एक हज़ार सदस्य सैन फ़ांसिस्को छोड़कर गयाना चले गए थे.

कर चोरी के आरोप लगने के बाद भी संगठन के प्रमुख जिम जोंस लोगों में काफ़ी लोकप्रिय थे क्योंकि उन्होंने सभी नस्ल के लोगों के लिए चर्च स्थापित किया था.

उस संगठन को छोड़ कर आने वाले कुछ लोगों ने संगठन में मानवाधिकार हनन और सामूहिक आत्महत्या करने की तैयारी की बात कही थी लकिन उस समय किसी को उनकी बातों पर यक़ीन नहीं हुआ था.

आख़िरकार एक अमरीकी सांसद लियो रयॉन की अध्यक्षता में एक जांच दल गयाना गया था.

ये दल वहां तीन दिनों तक रहा और कई लोगों से बातचीत की लेकिन तीसरे दिन जब वो वापस जा रहे थे तभी हवाई अड्डे पर उस पर हमला हुआ.

उस हमले में सांसद रयॉन समेत कुल पांच लोग मारे गए थे.

इस घटना के बाद ही संगठन के सदस्यों ने सामूहिक आत्महत्या कर ली.

मारे गए 914 लोगों में से 412 मृतकों के शवों को लेने के लिए कोई आगे नहीं आया था इसलिए उन्हें कैलिफ़ॉर्निया में दफ़ना दिया गया था.

अमरीकी संसद ने इस पूरे घटनाक्रम की जांच की थी लेकिन जांच रिपोर्ट ने अमरीकी सरकार पर लगे सभी आरोंपों को ख़ारिज कर दिया था.

1991: ब्रितानी चर्च के दूत बैरूत में रिहा किए गए

Image caption विमान से बाहर आते हुए टेरी वेट.

चार साल से बंधक बनाए गए ब्रितानी चर्च के दूत टेरी वेट को इस्लामी चरमपंथियों ने 1991 में आज ही के दिन रिहा कर दिया था.

उन्हें 1987 में बंधक बनाया गया था लेकिन उससे पहले उन्होंने बैरूत में बंधक बनाए गए पश्चिमी देश के बहुत सारे नागरिकों को छुड़ाने में बहुत अहम भूमिका निभाई थी.

टेरी वेट के साथ एक अमरीकी शिक्षाविद टॉमस सदरलैंड को भी रिहा किया गया था.

सदरलैंड को 1985 में बंधक बनाया गया था.

ब्रितानी पत्रकार जॉन मैकार्थी और जैकी मैन की रिहाई के बाद इस्लामिक जिहाद की गिरफ़्त से रिहा होने वाले टेरी वेट आख़िरी ब्रितानी नागरिक थे.

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