इतिहास के पन्नों में 19 नवंबर

  • 19 नवंबर 2011

इतिहास के पन्नों को पलटें तो 19 नवंबर के दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटीं थीं.

1997: अनवर सादात का ऐतिहासिक इसराइल दौरा

इमेज कॉपीरइट AP
Image caption अमरीका की मध्यस्थता में इसराइल और मिस्र ने 1979 में 'कैंप डेविड' समझौता किया.

वर्ष 1977 में 19 नवंबर को मिस्र के तत्कालीन राष्ट्रपति अनवर सादात ने इसराइल का ऐतिहासिक दौरा किया.

इसराइल का दौरा करने वाले वो पहले अरब नेता थे.

दुनिया भर में उनके दौरे का विरोध हुआ और इसलिए सुरक्षा के पुख़्ता इंतज़ाम किए गए थे.

इसराइल ने इसके लिए 10 हज़ार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की थी.

अगले दिन यानि 20 नवंबर 1977 को सादात ने इसराइली संसद को संबोधित किया.

इसराइली संसद नेसेट को संबोधित करते हुए सादात ने कहा, ''हम सच्चे दिल से आपका हमारे बीच शांति और सुरक्षा से रहने के लिए स्वागत करते हैं.''

उनके दौरे के बाद मिस्र और इसराइल के बीच शांति वार्ता की शुरुआत हुई और फिर मार्च 1979 में दोनों देशों के बीच समझौता हुआ जिसे कैंप डेविड समझौते के नाम से जाना जाता है.

सादात और इसराइली प्रधानमंत्री मेनाचिम बेगिन के इस क़दम ने दोनों को पश्चिमी देशों में काफ़ी लोकप्रिय बना दिया था और उन दोनों को वर्ष 1978 के लिए शांति के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

लेकिन अनवर सादात को अरब दुनिया में काफ़ी विरोध का सामना करना पड़ा था.

अक्तूबर 1981 में राजधानी क़ाहिरा में हो रहे एक मिलिट्री परेड के दौरान सैनिकों ने गोली मार कर उनकी हत्या कर दी थी.

1985: सोवियत संघ और अमरीका के बीच शिख़र वार्ता

इमेज कॉपीरइट AP
Image caption गौरवाचेव और रीगन के बीच कई बार मुलाक़ात हुई

वर्ष 1985 में दुनिया की दो महाशक्तियों - पूर्व सोवियत संघ और अमरीका के बीच स्वीट्ज़रलैंड में शिख़र वार्ता की शुरुआत हुई थी.

अमरीका के तत्कालीन राष्ट्रपति रोनल्ड रीगन और सोवियत संघ के तत्कालीन राष्ट्रपति मिख़ाइल गौरबाचोव के बीच ये वार्ता छह साल के बाद हो रही थी.

लेकिन इस बातचीत के बीच सबसे बड़ी रुकावट थी अमरीका का प्रतिरक्षा कार्यक्रम जिसे स्टार वार्स का नाम दिया गया था.

अमरीका का मानना था कि दुनिया में शांति के लिए हथियारो की तैनाती ज़रूरी है.

शिखर सम्मेलन की समाप्ति तक कोई भी आधिकारिक जानकारी नहीं मिल पाई थी कि दोनों नेताओं को बीच क्या हुआ.

पहले दिन की समाप्ति के बाद राष्ट्रपति गौरबाचोव ने केवल इतना कहा कि दोनों नेताओं के बीच काफ़ी गंभीर बातचीत हुई थी.

सम्मेलन के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं मिलने के कारण मीडिया की निगाहें दोनों नेताओं की पत्नियों के कपड़े और उनकी मुलाक़ात पर टिकी हुई थीं.

मीडिया ने इन दोनों महिलाओं के कपड़े और हाव भाव को 'स्टाईल वार्स' का नाम दिया.

दोनों नेताओं के बीच जो समझौते हुए उनके मुताबकि़ दोनों देशों ने अपने-अपने परमाणु हथियारों के ज़ख़ीरे में 50 फ़ीसद तक की कमी करने की प्रतिबद्धता जताई.

इसके अलावा सोवियत संघ से उसके वहाँ रह रहे यहूदियों को बाहर जाने की इजाज़त देने पर भी चर्चा हुई.

अक्तूबर 1986 में दोनों नेताओं ने आइसलैंड में एक बार फिर शिख़र सम्मेलन किया.

लेकिन सकारात्मक शुरूआत के बाद शिखर सम्मेलन फेल हो गया क्योंकि अमरीका ने 'स्टार वार्स' कार्यक्रम को छोड़ने से मना कर दिया था.

संबंधित समाचार