लोया जिरगा में अमरीकी समझौता मंज़ूर

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Image caption चार दिवसीय लोया जिरगा में दो हज़ार से अधिक अफ़ग़ान नेता और क़बायली सरदार जुटे

अफ़ग़ानिस्तान में चार दिनों तक चली लोया जिरगा में अमरीकी सैनिकों के दूसरे विदेशी सैनिकों के चले जाने के बाद भी अमरीकी सेना के देश में बने रहने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया है.

प्रस्तावित सुरक्षा समझौते के तहत 2014 तक अधिकतर विदेशी सैनिकों के अफ़ग़ानिस्तान के लौट जाने के बाद भी अमरीकी सैनिक वहाँ बने रहेंगे.

मगर दस साल के लिए प्रस्तावित समझौते में अमरीका के लिए कई शर्तें भी रखी गई हैं.

इनमें अमरीकी सेना के रात में छापे मारने पर रोक लगाने और अफ़ग़ानिस्तान में अपराध करनेवाले अमरीकी नागरिकों के लिए छूट को ख़त्म करने जैसी शर्तें शामिल हैं.

ये समझौता बाध्यकारी नहीं है और इसे लागू करवाने के लिए अब इसे अफ़ग़ान संसद से पारित करवाना होगा.

समझौते को लेकर अभी अमरीका और अफ़ग़ानिस्तान की सरकारों के बीच विचार-विमर्श चल रहा है.

लोया जिरगा में हिंसा त्याग देनेवाले तालिबान सदस्यों के साथ शांतिवार्ता को भी समर्थन दिया गया.

चार दिनों तक चली लोया जिरगा या महासभा में अफ़ग़ानिस्तान के 2000 से ज़्यादा नेता और क़बायली जुटे.

इन प्रतिनिधियों को 40 समितियों में बाँटा गया था जिन्होंने आपस में चर्चाएँ कीं.

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