बदलाव की कोशिश पर पश्चिम की तर्ज पर नहीं: बर्मा

  • 20 नवंबर 2011

बर्मा के राष्ट्रपति थेन सेन ने कहा है कि उनकी सरकार लोकतांत्रिक बदलाव लाने की कोशिश कर रही है लेकिन ये बदलाव पश्चिम देशों में लोकतंत्र के जैसे नहीं हो सकते.

इंडोनेशिया में पूर्वी एशिया सम्मेलन में थेन सेन बर्मा के पत्रकारों से बात कर रहे थे. मीडिया से इस तरह की वार्ता कम ही होती है.

थेन सेन का कहना था कि विकास के लिए शांति और स्थायित्व ज़रूरी है और इसीलिए वे लोकतंत्र समर्थक नेता आंग सान सू ची के साथ सहयोग कर रहे हैं.

पिछले कुछ समय में बर्मा में कई राजनीतिक क़ैदियों को छोड़ा गया है और सेंसरशिप के नियम थोड़े नरम किए हैं.

इस साल अक्तूबर में बर्मा ने 180 से ज़्यादा राजनीतिक क़ैदियों को रिहा किया था.इनमें से कई लोग सालों से जेल में बंद थे.

राष्ट्रपति सेन ने चुनाव में हिस्सा लेने के सू ची के फ़ैसले का स्वागत किया. आंग सान सू ची के नेतृत्व वाले विपक्षी राजनीतिक दल ने दोबारा अपनी पार्टी को एक वैधानिक राजनीतिक दल की तरह पंजीकृत करवाने का निर्णय लिया है. उन्होंने कहा कि हाल में लाए गए सुधारों से बर्मा पर अंतरराष्ट्रीय दबाव कम होगा.

इस बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने बर्मा आने का न्यौता स्वीकार कर लिया है. संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी ने बताया कि बर्मा में जारी सुधारों से अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ नया तालमेल बन सकता है और बर्मा पर पाबंदियाँ हट सकती हैं.

अमरीका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन भी दिसंबर में बर्मा आने वाली हैं.

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