कौन हैं सैफ़ अल इस्लाम गद्दाफ़ी

इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption 1989 में एक अंतरराष्ट्रीय दौरे में अपने पिता कर्नल गद्दाफ़ी की बगल में खड़े सैफ़ अल इस्लाम गद्दाफ़ी

लीबियाई सरकार में किसी आधिकारिक पद पर ना होते हुए भी सैफ़ अल-इस्लाम को उनके पिता मुअम्मर गद्दाफ़ी के बाद देश की दूसरी सबसे ताक़तवर हस्ती माना जाता था.

पर अब अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय उनकी तलाश कर रहा है. उनपर कथित तौर पर फ़रवरी में हुए प्रदर्शनों के दमन के लिए मानवता के विरूद्ध अपराध करने का आरोप है.

विद्रोह होने तक, और सरकार के उसका जवाब देने तक, शानदार अंग्रेज़ी बोलनेवाले 39 वर्षीय सैफ़ को लीबिया सरकार का सुधारवादी चेहरा माना जाता था.

कर्नल गद्दाफ़ी की नौ संतानों में दूसरे नंबर पर आनेवाले सैफ़ ने विद्रोह के दौरान कई भाषण दिए जिसमें उन्होंने विद्रोहियों को “शराबी और बदमाश” और “आतंकवादी” तक कहा.

विद्रोहियों के त्रिपोली में प्रवेश करने के चंद घंटों पहले उन्होंने देश के सरकारी टीवी पर दिए गए भाषण में कहा था – "हम अपनी ज़मीन पर, अपने देश में हैं. हम लड़ते रहेंगे. छह महीने तक, एक साल तक, दो साल तक...और हम जीतेंगे."

बाद में विद्रोहियों ने उन्हें पकड़ लेने का दावा किया और तब अंतरराष्ट्री अपराध न्यायालय ने कहा कि उनके ख़िलाफ़ सुनवाई होगी.

लेकिन फिर वो नारे लगाते अपने समर्थकों के साथ त्रिपोली के बाहर एक होटल पहुँचे जहाँ अंतरराष्ट्रीय पत्रकार ठहरे हुए थे.

वहाँ फिर उन्होंने भाषण दिया जिससे लगा कि वो अपनी जीत को लेकर आश्वस्त हैं.

ये स्पष्ट नहीं हो सका कि तब क्या वाकई उनको पकड़ा गया था और क्या वो भागकर बाहर आ गए थे या ये कि उन्हें पकड़ने का दावा ही सच नहीं था.

रसूख़

सैफ़ इससे पूर्व लगातार ये कहते रहे कि लीबिया में लोकतंत्र ज़रुरी है और उन्होंने पश्चिम के साथ 200 से लेकर 2011 तक के विद्रोह के बीच सुलह की कोशिशों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

गद्दाफ़ी परिवार की चैरिटी संस्था के प्रमुख के तौर पर और कथित रूप से अरबों डॉलर की संपत्ति वाले एक कोष – लीबियाई निवेश प्राधिकरण – के प्रमुख के तौर पर उनके पास बहुत बड़ी राशि का नियंत्रण था जिसका इस्तेमाल उन्होंने पश्चिम के साथ संबंधों को बेहतर बनाने के लिए किया.

वो उस बातचीत में शामिल थे जिसके बाद उनके पिता ने परमाणु हथियार कार्यक्रम को छोड़ दिया.

उन्हें बुल्गारिया के छह चिकित्सकों की रिहाई में भी मध्यस्थता की जिनपर लीबिया के एक अस्पताल में बच्चों को एचआईवी संक्रमित करने का आरोप था.

सैफ़ ने 1988 के लॉकरबी धमाकों, 1986 के बर्लिन नाइटक्लब हमले और 1989 के यूटीए विमान को गिराने की घटनाओं में प्रभावित हुए परिवारों को मुआवज़ा दिलवाने के लिए भी मध्यस्थता की.

ये भी कहा जाता है कि 2009 में लॉकरबी धमाकों के अभियुक्त अब्दुलबासित अल मगराही को रिहा किए जाने के विवादास्पद फ़ैसले से जुड़ी बातचीत में भी वो लिप्त थे.

इन समझौतों के बाद अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में ढील दी गई और राजनीतिक और आर्थिक मंचों पर सैफ़ अल-इस्लाम की प्रमुखता के कारण लगने लगा कि लीबिया में बदलाव का दौर शुरू हो रहा है.

जीवन

इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption सैफ़ को लीबियाई सरकार का उदारवादी चेहरा माना जाता था

सैफ़ अल-इस्लाम के नाम का मतलब है – इस्लाम की तलवार.

एक प्रशिक्षित इंजीनियर सैफ़ अविवाहित हैं और लंदन में उनका एक घर है. उनके संबंध ब्रिटेन की राजनीतिक हस्तियों से लेकर राजपरिवार तक रहे हैं.

सैफ़ के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने दो बाघ पाले हुए थे और वे अक्सर रेगिस्तान में बाज़ों को लेकर शिकार करने जाते हैं.

साथ ही कहा जाता है कि उन्हें पेंटिंग करने का भी शौक है.

सैफ़ ने हमेशा ये कहकर इस बात से इनकार किया कि वो अपने पिता की सत्ता के उत्तराधिकार बनना चाहते हैं कि सत्ता कोई खेत नहीं कि उसे वसीयत में लिया जाए.

सैफ़ ने 2008 में राजनीति से सन्यास लेने का भी एलान कर दिया था.

उन्होंने राजनीतिक सुधारों का भी आह्वान किया था और इसी विषय को लेकर उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से डॉक्टरेट भी हासिल की थी.

उन्होंने संस्था को काफ़ी चंदा भी दिया था.

बाद में लीबिया में प्रदर्शनकारियों के दमन की ख़बर आने के बाद एलएसई के निदेशक हॉवर्ड डेविस ने त्यागपत्र दे दिया.

युनिवर्सिटी उनके पीएचडी शोधपत्र की भी जाँच कर रही है जिसके बारे में आरोप है कि वह चोरी किया गया दस्तावेज़ है.

संबंधित समाचार