इतिहास के पन्नों में 21 नवंबर

इतिहास के पन्नों को पलटें तो पाएंगें कि 21 नवंबर, 1979 के दिन पाकिस्तान में अमरीकी दूतावास को ध्वस्त किया गया था, तो वहीं ब्रिटेन में फ़ुट एंड माउथ बीमारी ने महामारी का रूप ले लिया था.

1979: पाकिस्तान में अमरीकी दूतावास पर हमला

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Image caption अयातुल्ला अली ख़मेनेई के बयान के बाद पाकिस्तान में हिंसा भड़क उठी थी.

21 नवंबर 1979 के दिन पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक हिंसक गिरोह ने अमरीकी दूतावास की इमारत को जलाकर ध्वस्त कर दिया था.

चार घंटे तक चली ये कार्रवाई तब शुरू हुई जब कुछ विद्यार्थियों ने दूतावास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और उसके गेट पर ताला लगा दिया.

लेकिन ये विरोध प्रदर्शन तब हिंसक हो गया जब प्रदर्शनकारियों ने बाहरी दीवार को गिरा दिया और दूतावास के भीतर जा पहुंचे, जिसके बाद गोलीबारी शुरू हो गई.

दरअसल ये विरोध प्रदर्शन ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला अली ख़मेनेई के उस बयान के बाद शुरू हुआ जिसमें उन्होंने कहा था कि मक्का में इस्लाम के पवित्र स्थल में मस्जिद पर क़ब्ज़े के पीछे अमरीकी ताकतों का हाथ था.

अमरीका ने इस रिपोर्ट को ग़लत और ग़ैर-ज़िम्मेदार बताया था. उधर सउदी अरब के अधिकारियों ने भी घोषणा की थी कि मक्का की मस्जिद पर हुए क़ब्ज़ा मुसलमान कट्टरपंथियों ने किया था, न कि पश्चिमि ताकतों ने.

ये घटना ऐसे समय में हुई थी जब पाकिस्तान के अमरीका के साथ रिश्तों में कड़ुवाहट आ चुकी थी क्योंकि अमरीका ने जनरल ज़िया उल हक़ के मानवाधिकार रिकॉर्ड की आलोचना की थी.

2001 तक पाकिस्तान और अमरीका के रिश्तों में तनाव बरकरार रहा, जिसके बाद पाकिस्तान ने चरमपंथ के ख़िलाफ़ लड़ाई में अमरीका का साथ देने के लिए अपनी सहमति दी थी.

1967: फ़ुट एंड माउथ फैलने के बाद लाखों जानवर हलाल किए गए.

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Image caption बीमारी के महामारी का रूप धारण कर लेने के बाद लाखों जानवरों को मार दिया गया था.

21 नवंबर 1967 के दिन ही ब्रिटेन में फ़ुट एंड माउथ की महामारी फैलने के बाद मारे गए जानवरों की संख्या 1,34,000 तक पहुंच गई थी.

ये महामारी इस शताब्दी की अब तक की सबसे भयंकर महामारी थी.

नवंबर में फ़ुट एंड माउथ बीमारी का फैलाव चरम पर पहुंच गया था और 1968 में जून के महीने में ही इस पर थोड़ा क़ाबू पाया जा सका.

तब तक चार लाख जानवरों को हलाल किया जा चुका था और इस महामारी से लड़ाई पर सरकार ने 2 करोड़ 70 लाख पाउंड खर्च किए थे.

कड़े निरीक्षण के बाद आखिरकार 1968 में बीमारी पर काबू पाया जा सका, लेकिन 2001 में एक बार फिर इस बीमारी ने दस्तक दिया और इस बार इसका पैमाना 1967 में हुई महामारी से भी ज़्यादा था.

एक बार फिर महामारी के प्रकोप के बाद पूरे ब्रिटेन में करीब 40 लाख जानवरों को मारा गया था और इस बार सरकार को आठ अरब पाउंड का खर्चा उठाना पड़ा.

2001 की महामारी के बाद फ़ार्म में रखे जाने वाले जानवरों को इस बीमारी से लड़ने के लिए टीका लगाने की सलाह दी गई.

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