मिस्र: कैबिनेट ने इस्तीफ़ा दिया, तहरीर पर प्रदर्शनकारी डटे

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मिस्र के सरकारी टेलीविज़न के मुताबिक कैबिनेट ने सत्ताधारी सैन्य परिषद को अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया है

बताया जा रहा है कि परिषद इस बात पर विचार कर रही है कि इस्तीफ़े स्वीकार किए जाएँ या नहीं. कैबिनट के सदस्यों ने इस्तीफ़ा क्यों दिया इस बारे में स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है.

सरकारी एजेंसी मीना में कैबिनेट के प्रवक्ता का बयान जारी किया गया है जिसमें कहा गया है, “प्रधानमंत्री ऐसाम शरीफ़ की सरकार ने सेना की परिषद को अपना इस्तीफ़ा दे दिया है. देश में मुश्किल हालात को देखते हुए सरकार काम करती रहेगी.”

काहिरा में बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अब सेना के सामने सवाल ये है कि क्या वो नया कैबिनेट नियुक्त करने के लिए तैयार है और उसके सदस्यों को ज़्यादा अधिकार देगी.

संवाददाता के मुताबिक इस्तीफ़ा देने को सेना से ज़्यादा अधिकार माँगने की राजनेताओं की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है.

इस बीच सेना की अपील के बावजूद हज़ारों प्रदर्शनकारी अब भी तहरीर चौराहे पर जमा हैं. मिस्र की सैन्य सरकार के ख़िलाफ़ तीन दिन से चल रहे प्रदर्शनों में 33 लोग मारे जा चुके है.

प्रदर्शनकारियों की माँग है कि सत्ताधारी सैन्य परिषद असैन्य प्रशासन को सत्ता की बागडोर सौंप दे.

काहिरा में रात होते होते तहरीर चौराहे पर प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ रही है. मिस्र में अगले हफ़्ते चुनाव होने हैं लेकिन बहुत से लोगों को आशंका है कि चुनावी नतीजे कुछ भी हों सेना अपने अधिकार नहीं छोड़ेगी.

हिंसा

कई राजनीतिक गुटों के गठबंधन ने मंगलवार को बड़ी रैली का आह्वान किया है. इसमें मोहम्मद अल बारादेई के समर्थक भी शामिल हैं.

रैली के समर्थन में बने फ़ेसबुक पेज पर राष्ट्रीय सरकार बनाने की माँग रखी गई है और कहा गया है कि अप्रैल 2012 तक राष्ट्रपति चुनाव हों.

इससे पहले सोमवार को प्रदर्शनकारियों ने चौराहे के आसपास नाकेबंदी की और पुलिस पर पत्थर फ़ेंके. सुरक्षाबलों ने लाठियाँ चलाईं और आँसू गैस छोड़ी. हिंसा का क्रम शुक्रवार से जारी है.

सैन्य परिषद पर ये दायित्व है कि वो हुस्नी मुबारक के जाने के बाद लोकतंत्र लाने की प्रक्रिया की निगरानी करे. लेकिन संविधान के सिद्धांतों पर सेना के नए प्रस्तावित मसौदे से लोग ख़ासे नाराज़ हैं. इसमें सेना और इसके बजट को निगरानी के बाहर रखे जाने की बात है.

राष्ट्रपति चुनाव 2012 के अंत तक या 2013 तक टाले जाने के प्रस्ताव से भी विपक्ष नाख़ुश है.

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