तहरीर चौक पर कार्रवाई, 33 की मौत

  • 21 नवंबर 2011
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Image caption अब भी तहरीर चौक पर सैकड़ों लोग जमा हैं.

मिस्र की राजधानी काहिरा के तहरीर चौक पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़पों में कम से कम 33लोग मारे गए हैं. इन झड़पों में सैकड़ों लोग घायल भी हुए हैं.

रविवार को पुलिस और सेना ने तहरीर चौक को खाली करवाने की कोशिश में आंसू गैस छोड़ी और प्रदर्शनकारियों पर लाठियां चलाईं.

लेकिन इसके एक घंटे बाद प्रदर्शनकारी फिर से तहरीर चौक पर लौट आए और सैनिक प्रशासकों के ख़िलाफ़ नारे लगाने लगे.

यूरोपीय संघ ने तहरीर चौक पर हुई हिंसा की कड़े शब्दों में निंदा की है.

काहिरा के अलावा सुएज़, असवान और अलैग्ज़ेंड्रिया में भी झड़पों की ख़बरें हैं.

स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के मुताबिक रविवार की झड़पों में कुल 20 लोग मारे गए थे और दो की मौत शनिवार को हुई थी. अधिकारियों ने कहा है कि 40 सुरक्षाकर्मियों समेत क़रीब 900 लोग घायल हैं.

प्रदर्शनाकारियों का कहना है कि अंतरिम सैन्य सरकार सत्ता पर अपना कब्ज़ा बनाए रखना चाहती है.

ये हिंसा होस्नी मुबारक के सत्ता से हटाए जाने के बाद होने वाले संसदीय चुनावों से एक सप्ताह पहले हो रही है.

हिंसा की निंदा

यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख कैथरीन एशटन ने मिस्र की सरकार ने प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ हिंसा रोकने को कहा है.

कैथरीन एशटन ने कहा, “मैं शांति बनाए रखने का आहवान करती हूं और वहां हुई हिंसा की कड़े शब्दों में आलोचना करती हूं. मैं दोहराती हूं कि लोगों की बात सुनना और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करना अंतरिम सरकार की ज़िम्मेदारी है. ”

रविवार की हिंसा तब शुरू हुई जब प्रदर्शनकारियों ने तहरीर चौक से गृह मंत्रालय की ओर जाना शुरू किया.

अधिकारियों ने इन प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े और उसके बाद मंत्रालय की ओर जाने वाली सड़क को बंद कर दिया.

इसके घटनास्थल पर बख़्तरबंद गाड़ियां लाई गईं. तहरीर चौक पर कई सैनिक और पुलिसकर्मी पहुंचे और उन्होंने प्रदर्शनकारियों को पीटना शुरू कर दिया.

'इस्तीफ़ा दें फ़ील्ड मार्शल'

लेकिन घंटे भर बाद हज़ारों प्रदर्शनकारी एक बार फिर तहरीर चौक पर जुटने लगे.

एक प्रदर्शनकारी अहमद हानी ने समाचार एजेंसी एपी को बताया कि हिंसा ने ये साबित कर दिया है कि होस्नी मुबारक अब भी सत्ता में हैं. उन्होंने कहा कि मिस्र की सैनिक सरकार के प्रमुख फ़ील्ड मार्शल हुसैन तंतावी को तुरंत इस्तीफ़ा दे देना चाहिए.

अहमद हानी ने कहा, “हमारी एक ही मांग है कि फ़ील्ड मार्शल तंतावी इस्तीफ़ा दें और सत्ता एक गै़र-सैनिक परिषद को सौंपें.”

हिंसा की ये ताज़ा घटनाएं 28 नंवबर को होने वाले संसदीय चुनाव से पहले हो रही हैं. इससे पहले मिस्र के सैनिक प्रशासकों ने नए संविधान का मसौदा पेश किया था जिसमें सेना की बजट पर सरकारी नियंत्रण नहीं होने का प्रावधान था.

इससे प्रदर्शनकारी और भड़क गए हैं.

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