तहरीर चौक पर फिर जुटे हज़ारों लोग

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Image caption होस्नी मुबारक के 10 फ़रवरी को इस्तीफ़ा देने के बाद तहरीर चौक परिवर्तन का प्रतीक बन गया है

मिस्र की राजधानी काहिरा में हज़ारों प्रदर्शनकारी सेना के सत्ता छोड़ने की मांग करते हुए तहरीर चौक पर फिर एकत्र हुए हैं.

इससे पहले हज़ारों लोगों ने सोमवार की रात तहरीर चौक में गुज़ारी थी और मंगलवार को पुलिस ने हज़ारों प्रदर्शनकारियों पर आँसू गैस छोड़ी.

इससे पहले मिस्र की सैन्य सरकार के ख़िलाफ़ तीन दिन से चल रहे प्रदर्शनों में लगभग 30 लोगों के मारे जाने के बाद सोमवार को मिस्र के अंतरिम मंत्रिमंडल ने सैन्य परिषद को अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया था.

कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने सैन्य परिषद के साथ राजनीतिक संकट पर बातचीत की है और सरकारी टीवी का कहना है कि सैन्य परिषद के अध्यक्ष मोहम्मद हुसैन तांतावी राष्ट्र को संबोधित करेंगे.

मिस्र में इस साल की शुरुआत से ही सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे थे और कई हफ़्तों के प्रदर्शनों के बाद दशकों तक मिस्र पर शासन करने वाले होस्नी मुबारक ने इस्तीफ़ा दे दिया.

इसके बाद सेना ने सत्ता संभाली लेकिन कई महीनों के सैन्य शासन के बाद लोगों में कई तरह की आशंकाएँ हैं और प्रदर्शनों के ताज़ा घटनाक्रम से पर्यवेक्षकों को डर है कि अगले हफ़्ते होने वाले आम चुना हो भी पाएँगे या नहीं.

शांति की अपील

जिस समय प्रधानमंत्री एसाम शरफ़ ने इस्तीफ़े की घोषणा की उस समय तहरीर चौक पर 20 हज़ार लोग एकत्रित थे. इस साल के शुरुआत में जब होस्नी मुबारक के ख़िलाफ़ आंदोलन चल रहा था तो इसी चौक पर लाखों लोग जमा हुए थे.

बीबीसी संवाददाता वायर डेविस के अनुसार तहरीर चौक पर शोर और अराजकता का माहौल है. मंगलवार को कुछ जगहों पर झड़पें हुईं और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आँसू गैस भी छोड़ी.

प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे चुके एस्साम शराफ़ ने मंगलवार को शांति बनाए रखने की अपील की.

उन्होंने कहा, "मैं लोगों के केवल इतना कहना चाहता हूँ कि वे शांत रहें. जैसा लोग चाहते थे, हमने वैसा ही किया है. हम चुनावों के अपने मक़सद के इतना क़रीब थे. यही महत्वपूर्ण है, राजनीतिक परिवर्तन.."

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Image caption प्रदर्शनकारियों सैन्य परिषद की ओर से हाल में किए गए संशोधनों से नाराज़ हैं

ग़ौरतलब है कि कट्टरपंथी माने जाने वाले इस्लामी संगठन मुस्लिम ब्रदर्हुड को इन चनावों में मज़बूत दावेदार माना जा रहा है लेकिन उसने मंगलवार को प्रदर्शनों में भाग लेने से इनकार कर दिया है.

लोगों में गुस्सा क्यों?

इन प्रदर्शनों की शुरुआत शनिवार से हुई जब सैन्य परिषद की ओर से नियुक्त अंतरिम सरकार ने संविधान में संशोधनों का प्रस्ताव रखा.

इन संशोधनों के अनुसार सेना के बजट को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता.

इसके अलावा राष्ट्रपति के चुनाव को वर्ष 2012 के अंत तक या 2013 के शुरु तक टाले जाने के प्रस्ताव से भी लोग नाराज़ हुए.

प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि नवंबर में हो रहे संसदीय चुनाव के बाद ही राष्ट्रपति के चुनाव करवा लिए जाएं.

पर्यवेक्षक मानते हैं कि लोगों को डर है कि सैन्य परिषद किसी तरह से सत्ता में बनी रहना चाहती है.

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