बारूदी सुरंगों से आधी से ज़्यादा मौतें पाक, अफ़ग़ानिस्तान, कोलंबिया में

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Image caption हालाँकि बारूदी सुरंगों के बारे में जागरूकता बढ़ी है पर अफ़ग़ानिस्तान और ईरान में इनसे मारे जाने वालों की संख्या बढ़ी

दुनिया में बारूदी सुरंगों के वार्षिक सर्वेक्षण के अनुसार दुनिया में इस घातक हथियार का इस्तेमाल करने वाले देशों की संख्या बढ़ी है.

वैसे तो ज़मीन के नीचे दबी सालों साल जीवित रहने वाली इन बारूदी सुरंगों के खिलाफ़ दुनिया में धीरे धीरे जागरूकता आ रही है लेकिन अफ़गानिस्तान, ईरान सहित कुछ ऐसे देश हैं जहाँ इन बारूदी सुरंगों से होने वाली मौतों की संख्या में वृद्धि हुई है.

लैंडमाइन मॉनीटर की साल 2010 की रिपोर्ट में कहा गया है की बीते साल में सीरिया, लीबिया, बर्मा और इसराइल में इनका प्रयोग हुआ है.

कुल 4191 मारे गए

इस संस्था ने साल 2010 में बारूदी सुरंगों के ज़रिए हुई 4191 मौतों को सूचीबद्ध किया है. इसमें से आधी से ज़्यादा मौते केवल अफ़गानिस्तान, कोलंबिया और पाकिस्तान में हुई हैं.

साल 2009 में अफ़गानिस्तान में बारूदी सुरंगों के कारण 859 लोगों को अपनी जान गंवाना पड़ी लेकिन 2010 में यह संख्या बढ़ कर 1211 हो गई.

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Image caption 'इन बारूदी सुरंगों का शिकार होने वालों में 25 फ़ीसदी बच्चे होते हैं'

इसी तरह से ईरान में बारूदी सुरंगों के चलते मरने वाले 158 लोगों को सूचीबद्ध किया गया है. इससे पहले यह संख्या महज़ 17 थी.

इस रिपोर्ट के अनुसार दुश्मन के लड़ाकों के लिए दुनिया भर में बिछाई जाने वाली इन बारूदी सुरंगों के अधिकतर शिकार आम लोग होते हैं जिनका लड़ाई से कोई लेना देना नहीं होता.

इस रिपोर्ट के अनुसार मरने वाले 70 फ़ीसदी लोग आम नागरिक थे. इसी रिपोर्ट में यह बताया गया है कि इन बारूदी सुरंगों का शिकार होने वालों में 25 फ़ीसदी बच्चे होते हैं.

इस रिपोर्ट को लिखने वालों का कहना है कि मरने वालों की संख्या इससे कहीं ज़्यादा हो सकती है.

इसके अनुसार भारत, अफ़गानिस्तान, पकिस्तान, बर्मा सहित कई देशों में इन आंकड़ों को जमा करने का कोई सुनियोजित ढंग नहीं है. इन देशों में कई इलाके ऐसे हैं जहाँ चल रहे संघर्ष के कारण जाकर आंकड़े नहीं जमा किए जा सकते हैं.

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