सालेह ने समझौता किया, सत्ता छोड़ने को तैयार

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Image caption सालेह तीन महीने तक मानद राष्ट्रपति बने रहेंगे

यमन के राष्ट्रपति अली अब्दुल्लाह सालेह ने अपनी सत्ता उप राष्ट्रपति को सौंपने के समझौते पर हस्ताक्षर कर दिया है. इसके साथ ही उनके 30 वर्षों से ज़्यादा के शासन का अंत हो जाएगा.

अरब देशों ने इस समझौते के लिए मध्यस्थता की. राष्ट्रपति सालेह के ख़िलाफ़ पिछले नौ महीने से प्रदर्शन चल रहे हैं.

सऊदी अरब में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए, जिसका टीवी पर सीधा प्रसारण हुआ. इस मौक़े पर सऊदी अरब के शाह अब्दुल्लाह के साथ-साथ कई अरब देशों के विदेश मंत्री और यमन के विपक्षी नेता भी मौजूद थे.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की-मून ने कहा है कि सालेह ने उनको बताया है कि समझौते पर हस्क्षार के बाद वे इलाज के लिए न्यूयॉर्क जाना चाहते हैं.

समझौते के तहत राष्ट्रपति सालेह जल्द ही होने वाले चुनाव से पहले अपने अधिकार उप राष्ट्रपति को सौंप देंगे. इसके बदले उन पर कोई मुक़दमा नहीं चलाया जाएगा.

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Image caption यमन में सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन पिछले नौ महीने से चल रहा है

दूसरी ओर यमन की राजधानी सना में प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि वो उस समझौते को कभी स्वीकार नहीं करेंगे, जिसके तहत राष्ट्रपति सालेह के ख़िलाफ़ कोई मुक़दमा नहीं चलाया जाएगा.

सना से बीबीसी संवाददाता अब्दुल्लाह ग़ोराब के मुताबिक़ प्रदर्शनकारी ये कह रहे हैं कि अरब देशों ने 'शहीदों के ख़ून' की अनदेखी की है.

फरवरी में सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरू हुए थे. उसके बाद से प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ हुई कार्रवाई में सैकड़ों लोग मारे गए हैं और हज़ारों घायल हुए हैं.

69 वर्षीय राष्ट्रपति सालेह ने यमन पर वर्ष 1978 से शासन किया है. हालाँकि इससे पहले भी वे कई बार समझौते पर हस्ताक्षर करने को तैयार हुए हैं, लेकिन आख़िरी समय में हट गए हैं.

अब इस ताज़ा समझौते के तहत राष्ट्रपति अपनी सत्ता उप राष्ट्रपति अब्दराबुह मंसूर हादी को सौंप देंगे. इसके बाद हादी राष्ट्रीय एकता की एक सरकार का गठन करेंगे और 90 दिनों के अंदर राष्ट्रपति चुनाव की घोषणा करेंगे.

समझौते के तहत सालेह तीन महीने तक मानद राष्ट्रपति बने रहेंगे. राष्ट्रपति सालेह ने वादा किया है कि वे नई सरकार के साथ सहयोग करेंगे. इस सरकार में विपक्ष को भी शामिल किया जाएगा.

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