तहरीर चौक में एक लाख लोग, वरिष्ठ इमाम का मिला समर्थन

  • 25 नवंबर 2011
प्रदर्शनकारी इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption तहरीर चौक पर प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि सेना सत्ता छोड़े और सोमवार को होने वाले आम चुनाव स्थगित किए जाएँ

मिस्र में सेना के सत्ता से हटने की मांग करते हुए लगभग एक लाख लोग राजधानी काहिरा के तहरीर चौक पर जमा हुए हैं. प्रदर्शनकारी ये भी मांग कर रहे हैं कि सोमवार से होने वाले संसदीय चुनावों को स्थगित कर दिया जाए.

महत्वपूर्ण है कि मिस्र में सुन्नी मुसलमानों के सर्वोच्च इमाम ने प्रदर्शनकारियों को समर्थन देने और उनकी विजय के लिए दुआ मांगने का संदेश भेजा है.

मिस्र में प्रदर्शनकारी नारे लगा रहे हैं - "हम नहीं जा रहे, वो (फ़ील्ड मार्शल हुसैन तंतावी) जाएगा." सैकड़ों लोगों ने लाल, सफ़ेद और काले रंग का मिस्र का झंडा उठा रखा है.

ग़ौरतलब है कि प्रदर्शनकारियों में नोबेल पुरस्कार विजेता और राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार मोहम्मद अल बारादेई भी शामिल हो गए हैं. वे अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं.

राष्ट्रपति पद के एक अन्य उम्मीदवार डॉक्टर अब्देल मोनीम अबुल फ़ुतूह भी वहाँ मौजूद हैं.

लेकिन मिस्र में तहरीर चौक पर सेना के ख़िलाफ़ हो रहे प्रदर्शन के समानांतर काहिरा में ही एक और रैली सेना और सैन्य परिषद के फ़ील्ड मार्शल तंतावी के समर्थन में हो रही है.

ये दूसरा प्रदर्शन अब्बासिया चौक पर हो रहा है जिसे पूर्व राष्ट्रपति होस्नी मुबारक का गढ़ मारा जाता था.

वहाँ मौजूद लोग नारे लगा रहे हैं कि वे ही असली मिस्र हैं और तहरीर चौक पर हो रहे प्रदर्शनों के ख़िलाफ़ हैं.

विरोध से लोकतंत्र तक

इस साल की शुरुआत में दशकों से मिस्र पर शासन कर रहे होस्नी मुबारक के ख़िलाफ़ विरोध के स्वर शुरु हुए और फिर जनांदोलन में बदल गए.

लोग राजनीतिक सुधार, लोकतंत्र स्थापित करने और मुबारक के सत्ता छोड़ने की मांग कर रहे थे.

फ़रवरी में कई हफ़्तों के प्रदर्शनों और पश्चिमी देशों के दबाव के बाद होस्नी मुबारक ने सत्ता छोड़ने की घोषणा की थी.

अब उन पर अभियोग चल रहा है.

मुबारक के बाद सत्ता संभाली थी सेना ने लेकिन जनता राजनीतिक सुधारों की सुस्त गति से नाराज़ है और पिछले एक हफ़्ते से काहिरा और अन्य शहरों में प्रदर्शन हो रहे हैं.

इन प्रदर्शनों में पिछले कुछ दिनों में कम से कम 40 लोग मारे गए हैं और अनेक अन्य घायल हुए हैं.

इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption पिछले एक हफ़्ते में तहरीर चौक में हुए प्रदर्शनों में कम से कम 40 लोग मारे गए हैं

गुरुवार को सेना के दो वरिष्ठ जनरलों ने प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई के लिए माफ़ी मांगी थी, जो एक अभूतपूर्व घटना थी.

काहिरा और अन्य स्थानों पर हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद सैन्य प्रशासन की ओर से नियुक्त अंतरिम सरकार ने इस हफ़्ते की शुरुआत में इस्तीफ़ा दे दिया था.

प्रदर्शनकारी ये भी मांग कर रहे हैं कि सोमवार से होने वाले संसदीय चुनावों को स्थगित कर दिया जाए.

जल्द नागरिकों के सत्ता सौंपे: वरिष्ठ इमाम

मिस्र में काहिरा में सुन्नी इस्लाम के वरिष्ठ इमाम कभी-कभी ही राजनीतिक मुद्दों पर बोलते हैं.

लेकिन आश्चर्यजनक रूप से प्रदर्शनों पर उन्होंने अपना संदेश दिया है. उन्होंने कहा है कि सैन्य सरकार जल्द से जल्द नागरिक सरकार को सत्ता का हस्तांतरण करे.

मिस्र के सरकारी टीवी ने इस बात की पुष्टि की है कि पूर्व प्रधानमंत्री कमाल गन्ज़ौरी नई सरकार का नेतृत्व करेंगे. वे 1996 से 1999 तक मिस्र के प्रधानमंत्री रह चुके हैं.

पर्यवेक्षकों का मानना है कि 78-वर्षीय गनज़ौरी के प्रदर्शनकारियों को भाने की संभावना कम ही है.

अमरीका ने भी मिस्र की सरकार से कहा है नागरिक सरकार को जल्द से जल्द सत्ता सौंपी जानी चाहिए.

संबंधित समाचार