मिस्र के नए प्रधानमंत्री की जनता से अपील

गंज़ौरी
Image caption नवनियुक्त प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को संबोधित किया

मिस्र के नवनियुक्त प्रधानमंत्री कमाल गंज़ौरी ने देश की जनता से एक मौक़ा देने की अपील की है. देश के नाम अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वे सोमवार को होने वाले चुनावों से पहले कैबिनेट की घोषणा कर देंगे.

गंज़ौरी ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि सुप्रीम काउंसिल के प्रमुख फ़ील्ड मार्शल मोहम्मद हुसैन तंतावी सत्ता में बने रहना नहीं चाहते. उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता तो वे सरकार का नेतृत्व करने के लिए राज़ी नहीं होते.

अपने संबोधन में गंज़ौरी ने कहा, "कृपया मुझे एक मौक़ा दीजिए ताकि मैं विचार कर सकूँ और ये देखूँ कि कौन रहेगा और किसे जाना चाहिए. मैं अपना प्रस्ताव सुप्रीम काउंसिल में रखना चाहता हूँ."

कमाल गंज़ौरी होस्नी मुबारक के शासनकाल में भी वर्ष 1996 से 1999 तक प्रधानमंत्री रह चुके हैं. उन्होंने कहा कि सेना ने उन्हें ज़्यादा शक्ति दी है और आने वाले दिनों में वे अपनी सरकार का गठन करेंगे.

प्रदर्शन जारी

इस बीच काहिरा के मशहूर तहरीर चौक पर प्रदर्शनकारी जमे हुए हैं. वे तुरंत ही सैनिक शासन को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं.

वो संसदीय चुनावों को रद्द करने की भी मांग कर रहे हैं. लेकिन काहिरा में सेना के समर्थन में भी रैली निकाली गई.

इस सप्ताह प्रदर्शनों के दौरान 40 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं. काहिरा में मौजूद बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस कारण स्थिति तनावपूर्ण हो गई है.

प्रदर्शनकारियों को शक है कि सैनिक शासक सत्ता में बने रहना चाहते हैं.

हालाँकि सेना की सुप्रीम काउंसिल के प्रमुख फ़ील्ड मार्शल मोहम्मद हुसैन तंतावी ने लोकतांत्रिक सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज़ करने का वादा किया है.

समर्थन

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Image caption काहिरा के तहरीर चौक पर प्रदर्शनकारी जमे हुए हैं

हालाँकि मिस्र में एक तबका ऐसा भी है, जो चाहता है कि संसदीय चुनाव तय कार्यक्रम के मुताबिक़ ही हो.

मुस्लिम ब्रदरहुड के इन चुनावों में अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद है और वो प्रदर्शनकारियों के समर्थन में नहीं है.

शुक्रवार को काहिरा के अब्बासिया चौक पर कम से कम 10 हज़ार लोगों ने सेना के समर्थन में रैली निकाली. उन्होंने तहरीर चौक पर मौजूद प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ नारे लगाए और सैनिक परिषद का समर्थन किया.

इस बीच अमरीका ने कहा है कि मिस्र में जल्द से जल्द लोकतांत्रिक सरकार का गठन होना चाहिए. काहिरा के अलावा मिस्र के कई शहरों में भी सेना के विरोध में प्रदर्शन हुए हैं.

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