मिस्र में चुनाव तय समय पर: सैन्य परिषद

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Image caption तंतावी (दाएं) ने कहा है कि चुनाव समय पर होंगे

मिस्र पर शासन कर रही सैन्य परिषद ने कहा है कि देश में लगातार बढ़ रहे विरोधों के बावजूद सोमवार को होने वाले पूर्व नियोजित चुनावों के कार्यक्रम में कोई फेरबदल नहीं होगा.

फ़ील्ड मार्शल हुसैन तंतावी के मुताबिक वो किसी भी गुट को सेना पर दबाव डालने की इजाज़त नहीं देंगे.

तंतावी ने राष्ट्रपति पद के दोनों प्रमुख उम्मीदवारों मोहम्मद अल-बर-दई और अम्र-मोसा को निर्देश दिया है कि, वे प्रधानमंत्री के पद के लिए पिछले सप्ताह उनके द्वारा चुने गए उम्मीदवार का समर्थन करें.

हाल के प्रदर्शनों में कई लोगों की मौत हुई है और लोगों को डर है कि इससे चुनाव पर भी असर पड़ सकता है.

ये चुनाव सोमवार से शुरु हो रहे हैं और मार्च 2012 तक संसद के दोनों सदनों का चुनाव पूरा किया जाएगा.

प्रदर्शनकारियों को डर है कि सैन्य परिषद सत्ता छोड़ना नहीं चाहती है. उनकी मांग है कि चुनाव से पहले सेना का शासन खत्म होना चाहिए.

इस बीच फ़ील्ड मार्शल तंतावी ने कहा है कि पोलिंग बूथ की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी को सेना ठीक से निभाएगी. सरकारी अखबार अल अहराम के वेबसाइट से उन्होंने कहा, "हम गड़बड़ी फैलाने वालों को चुनाव में दखलअंदाज़ी का मौका नहीं देंगे. हम एक दोराहे पर खड़े हैं. यहां से एक रास्ता मिस्र में चुनाव और उसके बाद देश की सुरक्षा की ओर जाता है. दूसरा रास्ता चुनाव रोकने का है जिसे हम सफल नहीं होने देंगे."

प्रदर्शन

इस साल की शुरुआत में दशकों से मिस्र पर शासन कर रहे होस्नी मुबारक के ख़िलाफ़ विरोध के स्वर शुरु हुए और फिर जनांदोलन में बदल गए.

लोग राजनीतिक सुधार, लोकतंत्र स्थापित करने और मुबारक के सत्ता छोड़ने की मांग कर रहे थे. फ़रवरी में कई हफ़्तों के प्रदर्शनों और पश्चिमी देशों के दबाव के बाद होस्नी मुबारक ने सत्ता छोड़ने की घोषणा की थी.

अब उन पर अभियोग चल रहा है.

मुबारक के बाद सत्ता संभाली थी सेना ने लेकिन जनता राजनीतिक सुधारों की सुस्त गति से नाराज़ है और पिछले एक हफ़्ते से काहिरा और अन्य शहरों में प्रदर्शन हो रहे हैं.

इन प्रदर्शनों में पिछले कुछ दिनों में कम से कम 40 लोग मारे गए हैं और अनेक अन्य घायल हुए हैं.

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