नेपाल की संविधान सभा छह महीने और

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Image caption बाबूराम भट्टराई की सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती समय सीमा के भीतर संविधान तैयार करने की है

नेपाल में संविधान सभा के कार्यकाल को लेकर जारी राजनीतिक गतिरोध समाप्त हो गया है. सदस्यों ने मंगलवार को संविधान सभा के कार्यकाल को छह महीने बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी.

नेपाल में संविधान सभा का कार्यकाल चौथी दफा बढ़ाया गया है. संविधान सभा का कार्यकाल बुधवार को खत्म हो रहा था.

स्पीकर सुबाष चंद्र नेमवांग ने बताया कि मतदान के दौरान मौजूद 508 सांसदों में से 505 ने सभा का कार्यकाल बढ़ाए जाने के प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया

राजनीतिक दलों के बीच माओवादी लड़ाकों के एकीकरण और उनके पुनर्वास पर भी सहमति बन गई है.

कार्यकाल बढ़ाने का समर्थन

इससे पहले, नेपाल के चार प्रमुख दलों के नेताओं की बैठक हुई, इसमें संविधान सभा का कार्यकाल छह महीने और बढ़ाए जाने के लिए छह बिंदुओं पर सहमति बनी.

इस बैठक में 15 दिसंबर तक पूर्व माओवादी लड़ाकों को सेना में शामिल करने और उनके द्वारा कब्जे में ली गई लोगों की संपत्ति लौटाने पर भी रजामंदी बनी.

राजनीतिक दल संविधान निर्माण के बाद राष्ट्रीय सहमति की सरकार गठित करने पर भी राजी हुए.

महत्वपूर्ण है कि पिछले हफ्ते नेपाल के सुप्रीमकोर्ट ने था कि संविधान सभा का कार्यकाल अंतिम बार और सिर्फ छह महीने के लिए बढ़ाया जा सकता है.

संविधान सभा को मई 2008 में दो सालों के लिए गठित किया गया था और इसी अवधि में नेपाल का नया संविधान तैयार होना था. पर ऐसा नहीं हो सका और सभा का कार्यकाल चार बार बढ़ाना पड़ा.

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