ब्रिटेन में हड़ताल का व्यापक असर

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Image caption ब्रिटेन के तमाम बड़े शहरों में हड़ताली कर्मचारियों ने सरकार के विरोध में जुलूस निकाले हैं

ब्रिटेन में सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल से स्कूलों, अस्पतालों और अन्य सरकारी सेवाओं पर असर पड़ा है.

कोई 20 लाख सरकारी कर्मचारियों की इस हड़ताल से अधिकतर सरकारी स्कूल बंद रहे जबकि अस्पतालों में हज़ारों ऑपरेशन नहीं हो सके.

24 घंटे की हड़ताल के दौरान ब्रिटेन में लंदन समेत तमाम शहरों में प्रदर्शन हुए हैं.

मज़दूर संगठनों का कहना है कि सरकार की प्रस्तावित नीति के लागू होने से कर्मचारियों को पेंशन के लिए अधिक भुगतान करना होगा और पेंशन हासिल करने के लिए अधिक काम भी करना होगा.

ब्रिटिश सरकार ने हड़ताल को ग़ैर-ज़िम्मेदाराना ठहराते हुए कहा है कि सरकार का पेंशन प्रस्ताव समुचित और न्यायसंगत है.

प्रदर्शन

हड़ताल के दिन सरकारी सेवाओं के मज़दूर संगठनों ने सैकड़ों प्रदर्शन किए हैं.

लंदन में जुलूसों में तख्तियों पर इस तरह के संदेश लिखे थे – ज़्यादा काम ना करो, और कम पाने के लिए अधिक अदा ना करो.

लंदन में निकली विशाल रैली से निकले नारे प्रधानमंत्री आवास 10 डाउनिंग स्ट्रीट तक पहुँचे.

ब्रिटिश प्रधानमंत्री के एक प्रवक्ता ने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय का भी एक छोटा गुट हड़ताल कर रहा है जबकि कई कर्मचारी हवाई अड्डों पर आप्रवासन जाँच में मदद कर रहे हैं.

हड़ताल में शामिल कुछ मज़दूर संगठन अपने इतिहास में पहली बार हड़ताल कर रहे हैं.

आरोप और बचाव

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री ने हड़ताल को बेवजह बताते हुए कहा है कि सरकार की पेंशन योजना बिल्कुल वाजिब है.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने संसद में प्रश्नकाल में कहा,"मैं हड़ताल नहीं चाहता, मैं नहीं चाहता कि स्कूल बंद हों, ना लोगों को सीमाओं पर परेशानियाँ हों, मगर सरकार को ज़िम्मेदारी भरे फ़ैसले करने ही होंगे".

वहीं ब्रिटिश वित्तमंत्री ने कहा,"हड़ताल से कुछ हासिल नहीं होगा. इससे हमारी अर्थव्यवस्था और कमज़ोर होगी और लोगों की नौकरियाँ जा सकती हैं".

उन्होंने हड़ताली कर्मचारियों से दोबारा बातचीत शुरू करने की अपील की और कहा कि पेंशन को लेकर ऐसा समझौता होना चाहिए जिससे लोगों को तो पेंशन मिले ही, करदाताओं पर भी बोझ ना पड़े.

मगर मज़दूर संगठन - ट्रे़ड यूनियन कांग्रेस - के महासचिव ब्रेंडन बार्बर ने कहा कि सरकार का प्रस्ताव अन्यायपूर्ण है.

उन्होंने कहा,"हम इस हड़ताल तक आने से पहले महीनों तक चर्चाएँ करते रहे मगर सरकार अपने प्रस्तावों को मनवाने पर अड़ी है जिसके तहत लोगों को बहुत अधिक भुगतान करना पड़ेगा, लंबे समय तक नौकरी करनी पड़ेगी और अंत में बहुत कम पेंशन लेना पड़ेगा. ये सीधे-सीधे अन्यायपूर्ण है".

ब्रिटिश सरकार की दलील है कि ब्रिटेन पर भारी कर्ज़ को देखते हुए बदलावों को ना करने से देश दीवालिया हो सकता है.