शादी से इनकार किया तो तेज़ाब से हमला

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Image caption अफ़ग़ानिस्तान में तेज़ाब की शिकार महिला

उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान में शादी का प्रस्ताव ना मानने पर एक परिवार के पांच सदस्यों पर तेज़ाब फेंकने का मामला सामने आया है.

कुंडूज़ इलाक़े में ये घटना उस वक़्त हुई जब पीड़ित परिवार ने अपनी बड़ी बेटी मुमताज़ के साथ अभियुक्त के शादी के प्रस्ताव को ठुकरा दिया.

नाराज़ अभियुक्त ने अपने कुछ साथियों के साथ पीड़ि लड़की के घर पर धावा बोला और घरवालों के साथ पहले मारपीट की, फिर घर में मौजूद सभी पांच सदस्यों मुमताज़, उसकी दो बहनों और माता-पिता के चेहरे पर तेज़ाब से हमला कर दिया.

इस हमले में मुमताज़ और उसके पिता गंभीर रुप से झुलस गए हैं, हालांकि उनकी दो बहनों और मां की हालत ख़तरे से बाहर है.

अफ़ग़ानिस्तान स्थित बीबीसी संवाददाता के अनुसार तेज़ाब से हमला करने का चलन वहां आम होता जा रहा है और इसकी ज़्यादातर शिकार महिलाएं होती हैं.

पीड़ित परिवार का कहना है कि इस घटना की वजह मुमताज़ के पिता के ज़रिए स्थानीय नागरिक सेना 'अरबाकी' के एक सैनिक के साथ उसकी शादी के प्रस्ताव को ठुकराया जाना था. उनका कहना है कि उस शख़्स की उम्र मुमताज़ से काफ़ी ज़्यादा थी.

बढ़ती समस्या

काबुल में बीबीसी संवाददाता बिलाल सरवारी को लड़की के परिवार ने बताया कि हमलावर एक अपराधी प्रवृत्ति का व्यक्ति है.

लड़की के परिवार वालों का कहना था, ''ऐसी कोई वजह नहीं है कि हमें उसकी अनुचित मांगों के सामने झुकना चाहिए, उसने एक गंभीर अपराध किया है और अब पुलिस को उसके ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए.''

अरबाकियों पर पहले भी बलात्कार, पैसा वसूली के कई आरोप लग चुके हैं.

लेकिन कुंडूज़ के लोगों का मानना है कि पुलिस शायद ही अभियुक्त पर कोई कार्रवाई करे, क्योंकि 'अरबाकी समूह' तालिबानियों के ख़िलाफ़ लड़ाई में पुलिस के साथ है.

लेकिन पुलिस का कहना है कि कुंडूज़ में एक भी अरबाकी नहीं है.

इसके बावजूद इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि इलाक़े में तेज़ाब से हमले के मामले लगातार बढ़ते जा रहें हैं.

यहां तालिबान के असर वाले दक्षिण और पूर्वी इलाक़ों में भी स्कूली छात्राओं पर तेज़ाब फेंकने की घटनाएं हो चुकी हैं.

जनवरी महीने में वरिष्ठ अफ़ग़ानी पत्रकार अब्दुल रज़ाक़ मेमन पर भी काबुल में तेज़ाब फेंका गया था जिसमें वो गंभीर रुप से जल गए थे.

मिलते-जुलते मामले

तेज़ाब फेंकने की घटना एशिया और उत्तर-पूर्व एशिया में आम होता जा रहा है. इससे पहले भी ऐसे कई मामले पड़ोसी देश पाकिस्तान और भारत में भी देखे गए हैं.

कुछ दिनों पहले पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में कुछ अज्ञात लोगों ने महिलाओं के एक समूह पर तेज़ाब से हमला किया था जिसमें चार महिलाएँ झुलस कर घायल हो गईं.

पीड़ित महिलाएं शिक्षिकांए थीं जो स्कूल की छुट्टी के बाद घर लौट रहीं थी.

इधर भारत में भी उच्चतम न्यायालय का कहना है कि तेज़ाब से होने वाले हमले के शिकार लोगों को न्याय नहीं मिल रहा है.

कुछ लोगों का मानना है कि भारत में बांग्लादेश की तरह सख़्त क़ानून की ज़रूरत है.

चंडीगढ़ में कुछ दिनों पहले दो लड़कियों पर तेज़ाब फेंका गया था, जिनमें से एक लड़की की इलाज के दौरान मौत हो गई थी.

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