बुद्धिजीवियों ने किया डाओ केमिकल्स का विरोध

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Image caption डाओ केमिकल्स का विरोध हॉन्ग कॉन्ग में भी हुआ है

लंदन में वर्ष 2012 में होने वाले ओलंपिक खेलों में अमरीकी कंपनी डाओ केमिकल्स की प्रायोजक के तौर पर भागीदारी के विरोध में आवाज़ें ते़ज़ होने लगी हैं.

बुद्धिजीवियों के एक बड़े समूह ने इसके ख़िलाफ़ बाक़ायदा अपना विरोध दर्ज करवाया है.

लेबर फ्रेंड्स ऑफ इंडिया के चेयरमैन बैरी गार्डनर के नेतृत्व में प्रतिष्ठित लोगों के एक दल ने ओलंपिक 2012 की लंदन ऑर्गेनाइज़िंग कमिटी के चेयरमैन लॉर्ड सेबेस्टियन को से अपील की है कि चार साल में एक बार होने वाले इस प्रतिष्ठित आयोजन से डाओ केमिकल को ना जुड़ने दिया जाए.

सेबेस्टियन को लिखे एक पत्र में इन लोगों ने कहा है कि दुनिया भर में लोगों ने 2012 अंत में होने वाले इस आयोजन से डाओ केमिकल्स को बाहर करने की मांग की है.

ये विरोध भोपाल गैस त्रासदी की 27वीं बरसी के अवसर पर किया गया है.

वर्ष 1984 में दो और तीन दिसंबर की दरम्यानी रात डाओ केमिकल्स के यूनियन कार्बाइड कारखान से रिसी ज़हरीली गैस से हज़ारों लोगों की मौत हो गई थी और दसियों हज़ार लोग अब तक इसके प्रभाव से पीड़ित हैं.

तब से अब तक गैस पीड़ित उचित मुआवज़े की लड़ाई लड़ रहे हैं जबकि डाओ केमिकल्स पर आरोप है कि वह अपनी ज़िम्मेदारियों से बच रहा है.

'शोहरत से पहले...'

जो पत्र ओलंपिक की आयोजन समिति को सौंपा गया है उसमें बहुत से नामचीन लोगों के हस्ताक्षर हैं.

इनमें ओलंपिक स्वर्ण विजेता हों या बॉलीवुड के अभिनेता, कलाकार, राजनेता और अन्य क्षेत्रों से आए प्रतिष्ठित लोग हैं.

इन लोगों ने कहा है, ''लंदन ओलंपिक के ज़रिए अपनी शोहरत बढ़ाने से पहले डाओ केमिकल्स को भोपाल गैस कांड में अपने ऊपर लगे आरोपों को खत्म करना चाहिए.''

पत्र में लिखा है कि, भोपाल गैस कांड में हुए 25 हज़ार लोगों की मौत के लिए यूनियन कार्बाइड कॉरपोरेशन ज़िम्मेदार है.

हस्ताक्षर करने वालों में फ़िल्मकार शेखर कपूर, प्रदीप कृष्णन, फोटोग्राफर रघु राय, भारतीय रेसिंग ड्राइवर आदित्य पटेल, लेखिका इंदिरा सिन्हा, अभिनेता मार्टिन शीन, नैन्सी डेलओलियो, डीजे पॉल ओकनफ़ोल्ड, कलाकार एंटनी गॉर्मली और अमरीकी शिक्षाविद नॉम चोम्स्की शामिल हैं.

सूची में ब्रिटेन के भी कुछ बड़े नाम शामिल हैं, जिनमें लंदन की पूर्व मेयर केन लिविंगस्टोन, कंसर्वेटिव पार्टी की सांसद प्रीति पटेल और लिबरल डेमोक्रैट पार्टी की नेता सिमोन ह्यूग्स शामिल हैं.

लिविंगस्टोन ने कहा, ''भोपाल गैस त्रासदी को हुए 27 साल हो गए हैं लेकिन आज भी इस हादसे के पीडि़तों को न्याय नहीं मिल पाया है. ये शर्मनाक बात है कि हादसे के तीन दशक बाद भी उन इलाकों में पानी में ज़हरीला रसायन मौजूद है.''

ये और बात है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तो डाओ केमिकल्स का इतना विरोध हो रहा है लेकिन भारतीय ओलंपिक संघ ने साफ़ कर दिया है वह ओलंपिक के बहिष्कार के पक्ष में नहीं है.

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