'इसराइल मध्य-पूर्व के देशों से संबंध बेहतर करे'

  • 3 दिसंबर 2011
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Image caption पनेटा ने इसराइल को मध्य-पूर्व में 'एकाकीपन' से बाहर आने की सलाह दी है.

अमरीकी रक्षा मंत्री लियोन पनेटा ने इसराइल से कहा है कि वो तुर्की और मिस्र समेत मध्य-पूर्व के अन्य देशों से संबंधों को बेहतर बनाए. उन्होंने इसराइल से फ़लस्तीन के साथ फिर से बातचीत शुरू करने का भी आग्रह किया है.

लियोन पनेटा का कहना था कि मध्य-पूर्व में अलग-थलग पड़ रहे इसराइल को इससे बाहर आने की ज़रूरत है.

हालांकि वॉशिंगटन में एक भाषण के दौरान अमरीका के रक्षा मंत्री ने ये भी कहा कि इस स्थिति के लिए इसराइल अकेले ज़िम्मेदार नहीं है बल्कि उसे अलग-थलग करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय अभियान चलाया जा रहा है.

सभी अरब देशों में सिर्फ मिस्र और जोर्डन ही इसराइल को मान्यता देते हैं.

इसराइल की चिंता

पनेटा ने कहा कि अरब क्रांति की वजह से क्षेत्र के कई देशों में तानाशाह शासकों का तख़्तापलट हुआ है और इससे इसराइल का चिंतित होना स्वाभाविक है.

मिस्र में अभी चुनाव हुए हैं और पहले दौर में इस्लामी पार्टियों को बढ़त मिली है.

तुर्की ने इसराइल को वर्ष 1949 में मान्यता दे दी थी. लेकिन राहत सामग्री ले जा रहे तुर्की के एक बेड़े पर गज़ा के पास इसराइल के हमले में नौ तुर्की नागरिकों के मारे जाने के बाद, दोनों देशों के बीच खटास पैदा हो गई है.

पनेटा ने कहा, “बदकिस्मती से पिछले एक वर्ष में हमने देखा है कि इसराइल की अपने पुराने सुरक्षा सहयोगी देशों से दूरी बढ़ी है और मध्य-पूर्व के लिए एक व्यापक शांति योजना की प्रक्रिया भी रुक गई है.”

आख़िरी विकल्प

पनेटा ने इसराइल को फिर से फलस्तीन के साथ शांतिवार्ता शुरू करने को कहा है.

संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता लेने की फिलिस्तीन की कोशिशों और विवादित इलाकों में इसराइल के निर्माण कार्य जारी रखने की वजह से पिछले एक वर्ष से दोनों के बीच शांति प्रक्रिया रुकी हुई है.

पनेटा ने कहा, “इसराइल को फिलिस्तीन के साथ शांति बहाली के लिए आगे बढ़ना चाहिए, फिलिस्तीनी शासन को चुनौती देने के बजाय उसे मज़बूत करना ही इसराइल के हक़ में होगा”.

जब उनसे पूछा गया कि इसके लिए इसराइल को क्या करना चाहिए, तो उन्होंने कहा कि इसराइल को बातचीत के लिए सामने आना होगा और परेशानी यही है कि अमरीका ये नहीं करवा पा रहा.

ख़तरा

पनेटा ने कहा कि परमाणु हथियारों से लैस ईरान मध्य-पूर्व की सुरक्षा और समृद्धि के लिए सबसे बड़ा ख़तरा बनकर उभर सकता है.

उन्होंने कहा कि अमरीका इसराइल की सुरक्षा के लिए वचनबद्ध है और कभी भी ईरान को परमाणु हथियार नहीं जुटाने देगा.

इससे पहले अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ईरान को परमाणु हथियार निर्माण से रोकने के लिए सैन्य कार्रवाई के विकल्प की भी चर्चा की थी.

लेकिन पनेटा ने कहा कि इससे ईरान का कार्यक्रम महज़ एक या दो वर्ष तक ही रोका जा सकेगा इसलिए ये आख़िरी विकल्प होगा.

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