असांज प्रत्यर्पण की लड़ाई जारी रख सकेंगे

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Image caption पिछले महीने लंदन के हाई कोर्ट ने सेक्स अपराध संबंधी आरोपों के चलते जूलियन असांज को स्वीडन भेजने का फ़ैसला सुनाया था.

विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन असांज अपने प्रत्यर्पण के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट से सुनवाई के लिए निवेदन कर सकते हैं.

पिछले महीने लंदन के हाई कोर्ट ने सेक्स अपराध संबंधी आरोपों के चलते जूलियन असांज को स्वीडन भेजने का फ़ैसला सुनाया था.

हालांकि असांज इन आरोपों से इनकार करते हैं.

जजों ने असांज को सुप्रीम कोर्ट में सीधे अपील करने की इजाज़त नहीं दी है, लेकिन कहा कि उनका मामला सार्वजनिक तौर पर महत्वपूर्ण है.

अब वे सीधे सुप्रीम कोर्ट से अपना मामला देखने के लिए निवेदन कर सकते हैं.

हालांकि अब भी असांज को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए सीधे तौर पर अधिकार नहीं मिला है. यानी सुप्रीम कोर्ट अगर सुनवाई के लिए राज़ी होता है, तभी ये मामला वहाँ जा सकता है, असांज सीधे सुप्रीम कोर्ट में अपील नहीं दायर कर सकते.

40 वर्षीय असांज विकीलीक्स के संस्थापक हैं, जिन्होंने हज़ारों गुप्त दस्तावेज़ों को जारी कर अमरीका को नाराज़ किया है.

ऑस्ट्रेलिया के रहने वाले असांज पर स्टॉकहोम में अगस्त 2010 में एक महिला के बलात्कार और दूसरी महिला के यौन प्रताड़ना के आरोप हैं.

'राजनीति से प्रेरित'

असांज को यूरोप में जारी किए गए गिरफ़्तारी के वारंट पर एक साल पहले लंदन में गिरफ़्तार किया गया था. तब से ही वह ज़मानत की कड़ी शर्तों पर एक समर्थक के यहां रह रहे हैं. उनका कहना है कि उनकी गिरफ़्तारी राजनीति से प्रेरित है और विकीलीक्स की गतिविधियों से जुड़ी है.

असांज का तर्क था कि कोर्ट इस पर गौर करे कि क्या उनके ख़िलाफ़ जारी वारंट सही लोगों की ओर से सही तरीक़े से जारी हुआ है.

इससे पहले हाई कोर्ट ने कहा था कि असांज को स्वीडन भेजा जाए ताकि इन मामलों में उनसे पूछताछ की जा सके.

निचली अदालत ने भी असांज को प्रत्यर्पित करने का फ़ैसला दिया था, जिसके ख़िलाफ़ असांज ने हाई कोर्ट में अपील की थी.

कई सनसनीखेज़ और गुप्त दस्तावेज जारी करने वाली वेबसाइट विकीलीक्स वित्तीय समस्याओं से भी घिर गई थी, जिसके मद्देनज़र महत्वपूर्ण फ़ाइलों को छापना उन्हें रोकना भी पड़ा था.

विकीलीक्स का कहना था कि अमरीका स्थित कंपनियों ने आर्थिक सहायता देना बंद कर दिया था जिसके कारण कंपनी को ऐसा फ़ैसला करना पडा.

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