यूरोज़ोन के देशों की रेटिंग गिरने का ख़तरा बढ़ा

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Image caption मर्केल और सार्कोज़ी को उम्मीद है कि नए क़दमों से यूरोज़ोन में स्थिरता आएगी

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड ऐंड पुअर्स ने जर्मनी और फ़्रांस सहित यूरो मुद्रा वाले 15 देशों की रेटिंग गिराने की आशंका बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दी है.

एसऐंडपी ने इन देशों को 'क्रेडिट वॉच' सूची में रखा है क्योंकि इन पर यूरोपीय ऋण संकट का गहरा असर होने की आशंका है.

निवेशकों के लिए ये ख़बर एक झटके की तरह आई और शुरुआती बढ़त के बाद शेयर बाज़ारों के साथ-साथ यूरो में भी गिरावट दर्ज की गई है.

एजेंसी ने कहा कि पूरे यूरोज़ोन की क्रेडिट रेटिंग पर नीचे जाने का काफ़ी दबाव है.

एसऐंडपी की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, "देशों को क्रेडिट वॉच में रखने के इस क़दम के पीछे हमारा ये मानना है कि यूरोज़ोन में पिछले कुछ हफ़्तों में संकट बढ़ा है और इसकी वजह से पूरे यूरोज़ोन की क्रेडिट रेटिंग के नीचे जाने की आशंका हो गई है."

सिर्फ़ दो ही देशों का नाम इस क्रेडिट वॉच में नहीं है. उनमें से पहला है साइप्रस जिसकी पहले ही समीक्षा हो रही है और दूसरा है ग्रीस जिसकी रेटिंग पहले ही काफ़ी कम की जा चुकी है.

असर

इस ख़बर के सामने आते ही वित्तीय बाज़ारों पर इसका असर साफ़ दिखा.

डाओ जोन्स के शेयर सूचकांक ने दिन भर में काफ़ी बढ़त दर्ज की थी मगर इसके बाद वह बढ़त गिरकर सिर्फ़ 78.4 अंकों की रह गई.

डॉलर के मुक़ाबले यूरो की क़ीमत में आधे प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई.

अगर इन देशों की क्रेडिट रेटिंग कम होती है तो यूरो मुद्रा वाले कुछ देशों के लिए ऋण लेना मुश्किल हो जाएगा.

विश्लेषकों के अनुसार ये क़दम उस अनिश्चितता की ओर इशारा करता है जिसके तहत अगर यूरोज़ोन से इटली जैसा कोई बड़ा देश ऋण वापस करने की हालत में न रहे तो क्या होगा.

नई संधि

आरबीसी कैपिटल मार्केट्स में वरिष्ठ अमरीकी अर्थशास्त्री जैकब ओबिना कहते हैं, "जिस तरह के मुद्दे हैं और जिस तरह इन देशों ने संकट से निबटने का कोई सही रास्ता नहीं खोजा है तो मेरे विचार से इसकी आशंका काफ़ी समय से थी."

यूरोपीय संघ के नेताओं की शुक्रवार को बैठक होने वाली है जिसमें इस पर विचार होगा कि यूरोज़ोन को कैसे स्थिरता दी जाए और रेटिंग गिरने की ये चेतावनी उससे ठीक पहले आई है.

फ़्रांस और जर्मनी के नेताओं ने कहा है कि यूरोपीय संघ को अब एक नई संधि की ज़रूरत है जिससे देश आगे से अपने ऋणों पर ख़ुद ही नियंत्रण कर सकें.

उन्होंने यूरोज़ोन के देशों से कहा है कि वे अपने बजट पर कड़ी लगाम लगाएँ और अगर वे घाटे में जाते हैं तो उन्हें प्रतिबंधों तक का सामना करना पड़ सकता है.

मगर ये नेता उधार की साझा प्रणाली लागू करने पर राज़ी नहीं हैं जहाँ वो उधार चुकता करने की गारंटी सभी सदस्य देशों की होगी. जर्मनी को डर है कि अगर ऐसा हुआ तो आगे चलकर उसकी अपनी क्रेडिट रेटिंग को बड़ा ख़तरा पैदा हो सकता है.

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