‘अशांति की वजह बन सकता है यूरोज़ोन संकट’

  • 10 दिसंबर 2011
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Image caption ब्रिटेन अकेला ऐसा देश है जो इस अनुबंध के हक में नहीं और इस मामले पर अब अलग-थलग है.

अमरीकी सेना के एक वरिष्ठ कमांडर जनरल मार्टिन डेंप्सी ने कहा है कि यूरोज़ोन में फैले आर्थिक संकट से यदि जल्द निपटा नहीं गया तो उन्हें डर है कि इससे कई देशों में अशांति फैल सकती है.

वॉशिंगटन में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि फिलहाल यह स्पष्ट रुप से यह नहीं कहा जा सकता कि यूरोज़ोन की ओर से उठाए गए ताज़ा क़दम कितने कारगर साबित होंगे.

समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक उन्होंने कहा कि यूरोज़ोन के संकट से यूरोपीय संघ के टूटने का ख़तरा बढ़ता जा रहा है और अगर ऐसा हुआ तो इसका असर आर्थिक क्षेत्र के अलावा कई जगह होगा.

यूरोज़ोन संकट से निपटने के लिए यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों में से 26 देशों ने कर और खर्च में कटौती संबंधी अनुबंध पर सहमति दे दी है

इस नए अनुबंध के मुताबिक इसमें शामिल सदस्य देशों के राष्ट्रीय बजट में ज्य़ादा तालमेल स्थापित किया जाएगा.

जो सदस्य देश अपने वित्तीय घाटे में अनुबंध के नियमों का उल्लंघन करेंगे उनपर जुर्माना भी लगाया जाएगा. यूरोपीय केंद्रीय बैंक के मुख्य अधिकारी के अनुसार इस समझौते से यूरो देशों की आर्थिक नीति अनुशासित होगी.

अलग-थलग पड़ा ब्रिटेन

हालांकि ब्रिटेन इस अनुबंध के हक में नहीं और इस मामले पर अब अलग-थलग पड़ गया है.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने यह कहते हुए इस क़रार पर सहमति से इनकार कर दिया है कि उनपर ब्रिटेन के बाज़ारों और अपने देश के हितों की रक्षा का भार है.

यूरो मुद्रा का इस्तेमाल करने वाले सभी 17 देशों ने इस समझौते पर हस्ताक्षर के लिए सहमति दे दी है.

इसके अलावा नौ अन्य देशों ने कहा है कि वो अपने देशों की संसद में विचार-विमर्श के बाद बदलावों का समर्थन करने वाली इस संधि पर हस्ताक्षर करेंगे.

हंगरी ने पहले कहा था कि वो इस क़रार के हक में नहीं लेकिन अब वह भी इस संधि पर सहमत है.

भारत पर असर

यूरोप में छाए इस आर्थिक संकट के और गहरा होने की संभावना है. भारतीय अर्थव्यवस्था में छाई मंदी से इसका सीधा और प्रत्यक्ष संबंध नहीं दिखता लेकिन भारत के निर्यात पर इस संकट का ज़रूर असर पड़ेगा क्योंकि यूरोप भारत के लिए एक बहुत बड़ा बाज़ार है.

हालांकि भारतीय अर्थव्यवस्था घरेलू मांग पर ज़्यादा निर्भर है और भारत निर्यात से ज़्यादा आयात करता है. इन बातों के चलते एक मान्यता ये भी है कि भारतीय अर्थव्यवस्था यूरोज़ोन संकट से अपेक्षाकृत सुरक्षित रहेगी.

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