रूस के 50 शहरों में सरकार विरोधी विशाल प्रदर्शन

  • 11 दिसंबर 2011
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Image caption कई लोग इसे रूस में राजनीतिक पुनर्जागरण की संज्ञा दे रहे हैं.

रूस में मास्को समेत देश के 50 शहरों में हाल में हुए संसदीय चुनाव को रद्द किए जाने की मांग को लेकर विशाल प्रदर्शन हुए हैं.

लाखों प्रदर्शनकारियों ने जमा होकर 'पिछले दशक के सबसे बड़े आंदोलन' के दौरान दुबारा चुनाव करवाने और प्रधानमंत्री व्लादीमिर पुतिन के त्यागपत्र की मांग की.

मास्कों में प्रदर्शनकारियों ने हाथों में 'पुतिन को जाना होगा', और 'पुतिन का राजनीतिक दल विलेन और अपराधियों का अड्डा है' और 'सत्ता में बदलाव का वक़्त आ गया है' कहती तख़्तियां ले रखी थीं.

आंदोलनकर्ता 'हम फिर से चुनाव चाहते हैं' और 'चुनाव में धांधली हुई है' के नारे भी लगा रहे थे.

सबसे बड़ा प्रदर्शन

कहा जा रहा है कि सोवियत संघ के विघटन के बाद हुआ ये सबसे बड़ा प्रदर्शन था जिसमें जिसमें वामपंथियों से लेकर उग्र-राष्ट्रवादी और पश्चिम की ओर झुकाव रखने वाले उदारवादी, सभी राजनीतिक विचारधारा के लोग शामिल थे.

कुछ आंदोलनकारियों ने शरीर पर सफ़ेद पट्टियां बांध रखी थी जबकि कुछ के हाथों में सफ़ेद फूल थे. कुछ ने सफ़ेद ग़ब्बारे भी ले रखे थे.

बोलोत्नाया चौराहा, जो मध्यकालीन युग में आपराधियों को सज़ा दिए जाने का स्थान था, वहां शनिवार को हज़ारों मास्कोवासियों ने जमा होकर अधिकारियों पर मत चुराने का आरोप लगाया.

एक प्रदर्शनकारी व्लेरी का कहना था कि इस विद्रोह को एक प्रतीक चिन्ह की ज़रूरत है और सफ़ेद हमारी क्रांति का प्रतीक चिन्ह है.

व्लेरी का कहना था कि रूस जाड़ों के कठिन औक कष्ठदायक दौर से गुज़र रहा है इसलिए सफ़ेद रंग का चुनाव सही है.

नाकेबंदी

प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि संसद के चुनाव दुबारा करवाए जाएं और व्लादीमिर पुतिन पद से इस्तीफ़ा दें.

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Image caption भीड़ पर क़ाबू पाने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था का इंतज़ाम था.

मास्को में पुलिस ने लाल चौराहे की पूरी तरह से नाकेबंदी कर दी थी.

पुलिस ने इस बात के पुख़्ता इंतज़ाम किए थे कि लोग क्रेमलिन, यानि उस इलाक़े में जहां देश के नेताओं के दफ़्तर और निवास स्थान हैं, तक पहुंच पाने में किसी तरह से भी कामयाब न हो सकें.

हालांकि देश में 50 अन्य जगहों पर भी ऐसे प्रदर्शन आयोजित हुए लेकिन वो मास्को जितने बड़े नहीं थे.

सेंट पीटर्सबर्ग में हुए प्रदर्शनों में छात्र बड़ी संख्या में शामिल थे लेकिन साथ ही साथ बुज़ुर्गों की तादाद भी कम नहीं थी.

भीड़ पर क़ाबू पाने के लिए दंगा नियंत्रित करने वाली पुलिस मौजूद थी.

धमकी

पुलिसकर्मी प्रदर्शनों के वीडियो भी तैयार करते देखे गए. सुरक्षा की दृष्टि से हैलीकॉप्टर भी आसमान में चक्कर काट रहे थे.

विरोध रैली में शामिल एक छात्र का कहना था कि उन्हें प्रदर्शन में शामिल न होने को कहा गया है और धमकी दी गई है कि उन्हें विश्विविद्यालय से निकाला जा सकता है और जेल की सज़ा भी हो सकती है.

लेकिन प्रदर्शन सामान्यत: शांतिपूर्ण रहा.

हालांकि रूस में मौजूद बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इन प्रदर्शनों को अभी क्रांति का नहीं क़रार दिया जा सकता, विपक्ष के बीच अभी भी मतभेद क़ायम हैं और जैसा कि पुतिन के एक प्रवक्ता ने कहा कि अभी भी देश में पुतिन के समर्थक बड़ी संख्या में मौजूद हैं जो चाहते हैं कि वो दुबारा से राष्ट्रपति का पद ग्रहण करें.

लेकिन संवाददाता का कहना है कि ये भी सत्य है कि चाहे वो 1917 की रूसी क्रांति हो, या 1991 में हुआ सोवियत संघ का विघटन, रूस में क्रांति की शुरूआत हमेशा राजधानी मास्को से ही होती है.

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