अरब जगत में प्रदर्शनों पर भारत-पाक में कम उत्साह

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Image caption साल 2011 में अरब जगत में आए सियासी भूचाल में कई राष्ट्राध्यक्ष उखड़ गए हैं.

बीबीसी की ओर से 22 देशों में हुआ एक वैश्विक सर्वेक्षण दर्शाता है कि 55 प्रतिशत लोग अरब जगत में हुई उथल-पुथल को सही मानता है.

इस सर्वेक्षण में जिन देशों के लोग इन परिवर्तनों और प्रदर्शनों के प्रति सबसे कम उत्साहित हैं वो हैं भारत और पाकिस्तान.

इन दोनों देशों में दस में से चार लोग मानते हैं कि प्रदर्शन सकारात्मक थे. भारत में 41 प्रतिशत और पाकिस्तान में 40 फ़ीसदी लोग इन्हें सही मानते हैं.

इन प्रदर्शनों के प्रति यूरोपीय देशों के लोग काफ़ी उत्साहित दिखे.

लेकिन रूस में अरब जगत की उथल-पुथल को नकारात्मक मानने वालों की संख्या इन्हें सकारात्मक मानने वालों से अधिक है.

रूस में 43 फ़ीसदी लोग इन्हें नकारात्मक और 31 फ़ीसदी सकारात्मक मानते हैं.

इसके विपरीत चीन में इन प्रदर्शनों को 50 प्रतिशत लोग सकारात्मक मानते हैं और सिर्फ़ 27 प्रतिशत लोग ही इन्हें नकारात्मक मानते हैं.

अरब जगत में प्रदर्शन?
सकारात्मक नकारात्मक
भारत* 41* 30*
पाकिस्तान* 40* 35*
रूस 31 43
चीन 50 27
नाइजीरिया 67 27
कीनिया 65 26
जर्मनी 78 14
फ़्रांस 76 16
अमरीका 64 24

यूरोप में उत्साह

लेकिन यूरोप में अरब जगत में हुए परिवर्तनों को लेकर ख़ासा उत्साह है. जर्मनी में 78 प्रतिशत और फ़्रांस में 76 प्रतिशत लोग इसे सकारात्मक घटनाक्रम मानते हैं.

होस्नी मुबारक को सत्ता से उखाड़ फेंकने वाले मिस्र के 72 प्रतिशत लोग भी अरब विश्व में हुई घटनाओं को अच्छा मानते हैं लेकिन वहां चार में एक व्यक्ति इनसे सहमत नहीं है.

आपको बता दें कि ये सर्वेक्षण गद्दाफ़ी की मौत से पहले और मिस्र और सीरिया में ताज़ा प्रदर्शनों से पहले किया गया था.

अधिकतर की नज़र में सकारात्मक

ग्लोबस्कैन द्वारा किए गए इस सर्वेक्षण में 21,558 लोगों से बात की गई.

इनमें से 55 फ़ीसदी ने कहा कि अरब जगत में हो रहे प्रदर्शन सकारात्मक हैं. क़रीब एक चौथाई (28 प्रतिशत) लोगों ने इन्हें नकारात्मक बताया.

अन्य लोग लोग इस विषय पर कोई निर्णय नहीं ले पाए.

दिलचस्प है कि अरब जगत के पड़ोस यानि अफ़्रीका में जिन दो देशों में ये सर्वेक्षण किया गया वहां एक बड़ा बहुमत प्रदर्शनों के समर्थन में दिखा.

नाइजीरिया में 67 प्रतिशत और कीनिया में 65 प्रतिशत लोग इन प्रदर्शनों को सकारात्मक मानते हैं.

इस सर्वेक्षण के लिए 22 देशों में 21,558 नागरिकों का सीधे या फ़ोन द्वारा साक्षात्कार लिया गया. ये सर्वेक्षण तीन जुलाई 2011 से लेकर 16 सितंबर 2011 तक करवाया गया. ये सर्वेक्षण ग्लोबस्कैन ने बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के लिए किया है. 22 में से आठ देशों में सिर्फ़ प्रमुख शहरों में ही लोगों से बात की गई है. इस सर्वेक्षण के दो से लेकर 4.4 प्रतिशत तक ऊपर-नीचे ‘ग़लत होने की संभावना’ है.

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