मदर टेरेसा की संस्था विवादों के घेरे में

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श्रीलंका के कोलंबो शहर में मौजूद एक संस्था प्रेम निवास के परिसर में मदर टेरेसा की एक भव्य मूर्ति खड़ी है और माहौल ज़रूरत से ज़्यादा चुप्पी का है.

इस संस्था की स्थापना मदर टेरेसा ने की थी और 31 बच्चों के अलावा ये जगह नवजात शिशुओं उनकी माताओं और कई गर्भवती महिलाओं के लिए एक बसेरा है.

बीबीसी की पहचान के चलते यहां मौजूद ननों में मुझे संस्था के परिसर में घुसने की अनुमति तो दे दी लेकिन कोई भी यहाँ कुछ बोलने को तैयार नहीं.

दरअसल राष्ट्रीय बाल सुरक्षा प्राधिकरण (एनसीपीए) की ओर से प्रेम निवास में पिछले महीने छापा मारा गया और कई लोगों से पूछताछ की गई. अधिकारियों का कहना है कि ये संस्था चलाने वाली ननों ने कानून की अवहेलना करते हुए 16 साल से कम उम्र में गर्भवती हो गई लड़कियों के प्रसव कराए और संभावना है कि उनके शिशुओं को गोद देने के लिए कथित रुप से पैसा लिया.

मदर टेरेसा की ओर से स्थापित की गई किसी भी संस्था पर यह इस तरह की पहली कार्रवाई है. छापे के बाद हिरासत में ली गई प्रमुख नन एक भारतीय नागरिक हैं और तीन दिन हिरासत में रहने के बाद उन्हें ज़मानत मिल गई है.

इस बीच जांच एजेंसियों की ओर से इस संस्था की गतिविधियों को लेकर की गई जाँच की रिपोर्ट गुरुवार को ज़िलाधिकारी को सौंपी जाएगी और गड़बड़ियां पाए जाने पर संस्था के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई मुमकिन है.

'जान-बूझ कर कुछ ग़लत नहीं किया'

हालांकि रोमन कैथलिक चर्च ने संस्था पर लग रहे हर तरह के आरोपों को गलत ठहराया है और ननों को निर्दोष क़रार देते हुए उनके वकीलों ने कहा है कि 'जानते-बूझते हुए उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया.'

सेंट जोसेफ़ चर्च के पादरी सिरिल जैमिनी ने बातचीत के दौरान ये माना कि प्रेम निवास में कम उम्र की कुछ गर्भवती लड़कियों को पनाह दी गई लेकिन उनका मानना है कि इस मामले में संस्था की ओर से कोई आपराधिक गतिविधि नहीं की गई है.

उन्होंने बताया कि जिस लड़की को लेकर इस पूरे मामले ने तूल पकड़ा है वो असल में उसकी मांँ की ओर से यहाँ लाई गई थी.

वो कहते हैं, ''जिस समाज में हम रहते हैं उसमें कम उम्र में गर्भवती होने पर सामाजिक बहिष्कार झेलना पड़ता है. उस लड़की की मां को इस बात का डर था कि अगर ये मामला सामने आता है तो उसके रिश्तेदारों की प्रतिक्रिया विपरीत होगी. उसने हमसे अनुरोध किया कि इसके बारे में किसी को जानकारी न दी जाए. पादरी और नन होने के नाते ये हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम लोगों की मदद करें और उन्हें परेशानी में न डालें.''

इसके उलट एनसीपीए और आपराधिक जांच विभाग का मानना है कि नवजात शिशुओं के बदले पैसा लेना अपराध है और इस संस्था में छापा मारने के पीछे एक व्यक्ति की ओर से दी गई पुख़्ता ख़ुफ़िया जानकारी है.

श्रीलंका के राष्ट्रपति की पत्नी स्वयं कैथलिक हैं और सरकार इस मसले पर सावधानी से नज़र बनाए हुए है. साथ ही भारतीय उच्चायोग का कहना है कि इस मामले में भारतीय नागरिक के शामिल होने के चलते उच्चायोग की ये ज़िम्मेदारी है कि वो श्रीलंकाई अधिकारियों को उस नन से पूछताछ में सहायता करें.

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