इराक़ में उतर गया अमरीकी झंडा

  • 15 दिसंबर 2011
Image caption इस रस्म में अमरीकी रक्षा मंत्री और इराक़ के सेना प्रमुख ने हिस्सा लिया.

बग़दाद में अमरीकी झंडे को उतारने की रस्म पूरी होने के साथ ही इराक़ में अमरीका की नौ वर्षों की सैन्य कार्रवाई का औपचारिक अंत हो गया है.

अमरीकी रक्षा मंत्री लिओन पनेटा ने गुरुवार को अमरीकी सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा है कि इस दौरान जितना पैसा बहाया गया और जितना ख़ून बहा, वो इस ऑपरेशन के लिए ज़रूरी था.

सेना की प्रथा के मुताबिक़ इस रस्म से अब इराक़ में अमरीकी झंडा ‘सेवा-निवृत’ हो गया है. इसे अब अमरीका वापस ले जाया जाएगा.

लिओन पनेटा ने कहा, "बहुत सारा इराक़ी और अमरीकी ख़ून बहने के बाद, इराक़ के ख़ुद पर शासन कर पाने और अपनी सुरक्षा की ज़िम्मेदारी संभाल लेने का का लक्ष्य पूरा हो गया है."

इराक़ में तैनात 5,500 अमरीकी सैनिकों की आख़िरी टुकड़ी में से ज़्यादातर अपने देश वापस लौट चुके हैं और सुरक्षा इराक़ी अधिकारियों के हाथ में है.

इराक़ में चली सैन्य कार्रवाई में एक लाख इराक़ी और क़रीब 4,500 अमरीकी सैनिक मारे गए. इसमें अमरीका ने क़रीब एक ख़रब डॉलर खर्च किए हैं.

"बड़ी उपल्ब्धि"

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इराक़ से अमरीकी सैनिकों को वापस लाने के वायदे के साथ राष्ट्रपति का कार्यभार संभाला था.

इराक़ से लौटे अमरीकी सैनिकों को बुधवार को नार्थ कैरोलीना में संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अमरीका इराक़ को ‘एक स्वायत्त, स्थायी और आत्मनिर्भर’ देश के तौर पर छोड़ रहा है.

ओबामा ने इसे सैनिकों की ‘बड़ी उपल्ब्धि’ बताया और कहा कि वे ‘अपना सर ऊंचा कर’ इराक़ से लौट रहे हैं.

रिपब्लिकन पार्टी ने इराक़ के स्थायित्व पर चिंता जताते हुए वहां से अमरीकी सैनिकों के वापस बुलाए जाने की आलोचना की है. लेकिन ज़्यादातर अमरीकी इस फ़ैसले के पक्ष में हैं.

वर्ष 2003 में इराक़ पर हमला करने के बाद से अब तक क़रीब 15 लाख अमरीकी वहां तैनात किए गए थे. इस दौरान इनमें से क़रीब 30,000 घायल हुए.

वर्ष 2007 में सबसे ज़्यादा क़रीब 1,70,000 सैनिक वहां तैनात थे. पिछले वर्ष अगस्त में आख़िरी लड़ाकू अमरीकी टुकड़ी ने इराक़ छोड़ दिया था.

अब क़रीब 200 अमरीकी सैनिक इराक़ में सलाहकारों के रूप में रहेंगे. इसके अलावा क़रीब 15,000 अमरीकी अधिकारी बग़दाद में स्थित अमरीकी दूतावास में रहेंगे.

ये दुनिया में किसी भी अमरीकी दूतावास में काम कर रहे लोगों में सबसे ज़्यादा संख्या है.

‘मौत, बर्बादी और अव्यवस्था’

कई इराक़ियों का कहना है कि वे अपनी सुरक्षा की ज़िम्मेदारी को संभालने के परिणामों से डरते हैं.

बग़दाद में काम करने वाले एक व्यापारी मलिक आबेद ने कहा कि वो सद्दाम हुसैन से निजात दिलाए जाने के लिए अमरीका का आभारी है लेकिन, “मुझे लगता है कि अब हम फिर मुश्किल में पड़ जाएंगे, शायद आतंकवादी हम पर फिर से हमला करने लगें.”

लेकिन वर्ष 2004 में अमरीकी हमलों का निशाना रहे और चरमपंथियों के गढ़ माने जाने वाले फ़लूजा शहर में बुधवार को लोगों ने जश्न मनाया और अमरीकी झंडे जलाए.

एक व्यापारी, एहमद ऐद ने रॉएटर समाचार एजंसी को बताया, “किसी ने उनके वायदों पर यक़ीन नहीं किया था जब उन्होंने कहा कि वो हमारे देश में सुरक्षा और स्थायित्व लाएंगे, अब वो हमारे देश में मौत, बर्बादी और अव्यवस्था छोड़ कर जा रहे हैं.”

वॉशिंगटन में भी इराक़ के राजनीतिक ढांचों और सुरक्षा व्यवस्था के बारे में चिंताएं जताई गई हैं.

अमरीकी सैन्य कार्रवाई वर्ष 2003 में तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के नेतृत्व में शुरू हुई थी, लेकिन जल्द ही इसको मिल रहा जन-समर्थन कम होने लगा. जब सद्दाम हुसैन के विनाशकारी हथियार छुपाने और अल-क़ायदा के चरमपंथियों का समर्थन करने के दावे झूठे निकले.

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