'लिट्टे छापामारों ने लोगों को बनाया ढाल'

युद्ध के अपराधों
Image caption रिपोर्ट के अनुसार सरकार की नागरिकों पर जानबूझ कर हमला करने की कोई नीति नहीं थी.

श्रीलंका के राष्ट्रपति के ज़रिए गठित किए गए एक आयोग ने पाया है कि तमिल छापामारों के साथ लड़ाई के अंतिम पड़ाव में सेना ने नागरिकों को बचाने का पूरा प्रयास किया था.

लेकिन आयोग की रिपोर्ट ने तमिल छापामारों पर नागरिकों को अपनी ढाल बनाने का आरोप लगाया है.

'लेसन्ज़ लर्नट एंड रिकोन्सीलियेशन कमीशन' (एलएलआरसी) की रिपोर्ट ने सेना के ख़िलाफ़ नागरिकों पर बमबारी करने और आत्मसमर्पण करने वाले बाग़ियों के ग़ायब होने पर जाँच की माँग की है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि नागरिकों की हत्याओं और ऐसे अपराधों को बढ़ावा देने वालों की भी जाँच होनी चाहिए चाहे वे किसी भी तरफ़ रहे हों.

युद्ध अपराध के आरोपों की जाँच करवाने के अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते श्रीलंका सरकार ने पिछले साल आयोग का गठन किया था.

सरकारी नीति

दस महीनों में लिखी गई रिपोर्ट के अनुसार सरकार की नागरिकों पर जानबूझ कर हमला करने की कोई मंशा नहीं थी.

आयोग ने पाया कि सरकार ने तमिल छापामारों के साथ अंतिम चरणों में उन्हें बचाने का प्रयास किया.

दूसरी तरफ़ तमिल छापामारों ने लोगों को ढाल की तरह इस्तेमाल किया, उन पर गोलियाँ चलाईं और नागरिकों के इलाक़ों में हथियार रखे.

लेकिन रिपोर्ट ने कहा है कि नागरिकों पर हमले और आत्मसमर्पण के बाद ग़ायब होने की घटना की गंभीर तरीक़े से जाँच की जानी चाहिए.

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