इतिहास के पन्नों से

स्कॉटलैंड को अपनी पहली संसद देने वाला एक विधेयक 18 दिसंबर के दिन पारित हुआ था जबकि ब्रिटेन ने 'ब्लडी संडे' को हुई गोलीबारी में मारे गए लोगों को मुआवज़ा देने की घोषणा भी की थी.

1997 : स्कॉटलैंड की संसद का आगाज़

Image caption स्कॉटलैंड की संसद स्थापना के एक वर्ष बाद ही डॉनल्ड डेवार का देहांत हो गया था.

तीन सौ वर्षों में पहली बार स्कॉटलैंड को अपनी पहली संसद देने वाला एक विधेयक 18 दिसंबर 1997 में पारित हुआ था.

स्कॉटलैंड सचिव डॉनल्ड डेवार ने ग्लासगो में स्कॉटलैंड की राजनीति के भविष्य पर ये फ़ैसला सुनाया और हॉउस ऑफ लॉर्ड्स से अनुरोध किया की इस विधेयक को का़नून बनने में विलंब या अडंगा ना लगे.

उन्होंने कहा, "300 दिनों के भीतर ही हम लोगों ने स्कॉटलैंड के 300 वर्षों के इतिहास में सबसे बड़ा बदलाव किया है."

इस विधेयक के अंतर्गत स्कॉटलैंड की संसद में 129 सांसद होने तय किए गए थे और संसद का कामकाज साल 2000 तक शुरू होना था.

इस बात पर भी सहमति बन गई थी कि संसद एडिनब्रा में होगी.

साथ ही यह भी तय किया गया था कि 20 वर्ष से ज़्यादा की आयु वाला ब्रिटेन का कोई भी निवासी चुनावों में हिस्सा ले सकेगा.

हालांकि एक शर्त यह भी थी कि चुनावों में मताधिकार सिर्फ़ उन्हीं लोगों के पास रहेगा जो स्कॉटलैंड के निवासी हैं या फिर उनका मुख्य निवास उसी देश का है.

1974 : 'ब्लडी संडे' के पीड़ितों को मुआवज़ा

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Image caption ब्रितानी सैनिकों की गोलियों की चपेट में तेरह व्यक्ति आ गए थे.

ब्रिटेन की सरकार ने इसी दिन तय किया था कि करीब तीन साल पहले उत्तरी आयरलैंड में हुए दंगों हताहत हुए लोगों को 42,000 पाउंड की राशि का मुआवज़ा दिया जाएगा. इन दंगों को 'ब्लडी संडे' के नाम से जाना जाता है.

लंदनडेरी ज़िले में 1972 में 13 व्यक्तियों की मृत्यु तब हो गई थी जब कुछ प्रदर्शनकारियों पर ब्रितानी फौज ने गोलियां चलाईं थीं.

ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने इन मुआवज़ों की घोषणा करते हुए कहा था कि फ़ैसला 'दूरियों को कम करने और आपसी सौहार्द' बढाने के चलते लिया गया कदम है.

हालांकि दूसरी तरफ पीड़ितों के परिवारजन लगातार यही कहते रहे थे कि उन्होंने मुआवज़े की मांग इसलिए नहीं की थी जिससे ये बात ग़लत साबित हो सके कि उनके परिवार वाले बंदूकधारी और हमलावर थे.

मुआवज़े की घोषणा के कुछ दिन बाद पीड़ितों के परिवारजनों ने इसे स्वीकार तो कर लिया था लेकिन वे इस कानूनी लड़ाई को आगे भी लड़ते रहे.

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