इतिहास के पन्नों में 19 दिसंबर

  • 19 दिसंबर 2011

अगर इतिहास के पन्नों को पलटते हैं, तो देखेंगे कि हांगकांग को चीन को सौंपने के लिए ब्रिटेन और चीन के बीच हुए समझौते पर आज के दिन ही हस्ताक्षर किए गए थे और लीबिया के पूर्व नेता कर्नल गद्दाफ़ी ने रसायनिक हथियार नष्ट करने की घोषणा की थी जिसका अमरीका और ब्रिटेन जैसे देशों ने स्वागत किया था.

1984: ब्रिटेन और चीन के बीच समझौता

Image caption हांगकांग 150 सालों से अधिक समय तक ब्रिटेन का उपनिवेश रहा.

ब्रिटेन और चीन के बीच इस बात को लेकर समझौता हुआ कि ब्रितानी उपनिवेश हांगकांग 1997 में चीन को सौंप दिया जाएगा.

ब्रिटेन की प्रधानमंत्री मारग्रेट थैचर और चीन में उनके समकक्ष ज़ाओ ज़ियांग ने साझा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें इस बात पर फ़ैसला हुआ था कि तेरह सालों के बाद हांगकांग चीन के अधीन होगा.

दोनों मुल्कों के बीच हुई इस संधि के मुताबिक़ साल 1997 में हांगकांग में ब्रिटेन के 155 सालों का शासन समाप्त हो जाना था.

हांगकांग उन्नीसवीं सदी में हुए पहले 'अफीम युद्ध' के बाद ब्रिटिश शासन के अधीन चला गया था.

नई संधि के बाद दोनों देशों में व्यापार और राजनयिक क्षेत्र में नए संबंधों की शुरूआत भी हुई थी.

इस अवसर पर मारग्रेट थैचर ने कहा कि ये विशिष्ट परिस्थितयां हैं. ये अदभुत समझौता है.

ब्रिटेन की प्रधानमंत्री का कहना था कि ये ज़रूरी है कि हम इसपर गर्व करें और भविष्य को लेकर आश्वस्त रहें.

हांगकांग को चीन को पहली जुलाई 1997 से सौंपा जाना था और ये संधि 50 सालों के लिए लागू रहेगी.

इस संधि के तहत हांगकांग को विशेष प्रशासनिक क्षेत्र घोषित किया जाना था.

चीन ने इस बात का आश्वासन दिया था कि हांगकांग में पूंजीवादी व्यवस्था बरक़रार रहेगी. ये आश्वासन इसलिए ज़रूरा समझा गया क्योंकि चीन एक साम्यवादी देश है.

संधि में ये भी कहा गया था कि हांगकांग में लोगों को जिस तरह के अधिकार प्राप्त थे वो चीनी प्रशासन के शुरू होने के बाद भी क़ायम रहेंगे.

ब्रिटेन को इस बात की गारंटी दी गई थी कि विदेश और रक्षा मामलों को छोड़कर ब्रिटेन के पुराने उपनिवेश में स्वायत्ता बरक़रार रहेगी.

ब्रितानी प्रधानमंत्री का कहना था कि संधि पर सहमति से पहले काफी उतार चढ़ाव के दौर से गुज़रना पड़ा था.

2003: लीबिया की रसायनिक हथियारों को ख़त्म करने की घोषणा

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Image caption कर्नल गद्दाफ़ी की घोषणा के बाद लीबिया से पश्चिमी देशों के संबंध बेहतर हुए थे.

लीबिया ने आज के दिन अचानक ये घोषणा की कि वो अपने विनाशकारी हथियारों को नष्ठ करेगा.

लीबिया के तत्कालीन नेता मुअम्मर गद्दाफ़ी ने ये भी कहा था कि वो संयुक्त राष्ट्र के हथियार निरिक्षकों को भी वहां जाकर मुआयना करने की इज़ाज़त देने को तैयार हैं.

अमरीका ने लीबिया को ऐसे देशों की श्रेणी में रखा था जो आतंकवाद को बढ़ावा देता है.

लेकिन गद्दाफ़ी ने ऐलान किया कि लीबिया अपने सभी विनाशकारी हथियारों को नष्ठ कर देगा और अपने मिसाइलों की क्षमता को 300 किलोमीटर तक सीमित करेगा.

इसी समय ये बात भी सामने आई कि अमरीका और ब्रिटेन के विशेषज्ञ पहले ही जाकर लीबिया के पूरे कार्यक्रम का मुआयना कर चुके थे.

ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और उस समय अमरीका के राष्ट्रपति जार्ज बुश ने लीबिया की घोषणा का स्वागत किया था.

जार्ज बुश ने लीबिया पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को भी समाप्त करने की तरफ़ इशारा किया था.

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