अरब क्रांति शुरु करने वाले बुअज़ीज़ी की मूर्ति

  • 18 दिसंबर 2011
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Image caption मोहम्मद बुअज़ीज़ीजी की तस्वीर के साथ उनकी मां, बुअज़ीज़ीजी की मौत ने अरब देशों में क्रांति की मशाल जलाई

आज से ठीक एक साल पहले ट्यूनीशिया में ख़ुद को आग लगाकर फल विक्रेता मोहम्मद बुअज़ीज़ी ने सरकारी तंत्र के ख़िलाफ़ एक आंदोलन को जन्म दिया था. उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए ट्यूनीशिया में एक मूर्ति का अनावरण किया गया है.

मोहम्मद बुअज़ीज़ी की ख़ुदकुशी के बाद 23 साल से सत्ता पर क़ाबिज़ बेन अली के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरु हो गए थे.एक मामूली से फल विक्रेता मोहम्मद बुअज़ीज़ी के आत्मदाह के बाद सिदी बूज़ीद में शुरु हुआ विद्रोह धीरे-धीरे संपूर्ण अरब देशों में फैल गया.

बुअज़ीज़ी को श्रद्धांजलि देने वालों में वर्तमान राष्ट्रपति मोसेफ़ मरज़ाउकी भी शामिल हुए जिन्होंने सिदी बूज़ीद में मोहम्मद बुअज़ीज़ी की याद में आयोजित समारोह में लोगों का अभिवादन किया.

बुअज़ीज़ी को 90 प्रतिशत तक जली हुई अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां पांच जनवरी 2011 को उनकी मौत हो गई थी.

इस साल अक्तूबर महीने में ट्यूनीशिया में पहली बार हुए भ्रष्टाचार मुक्त चुनावों में राष्ट्रपति चुने गए मोसेफ़ मरज़ाउकी ने, ट्यूनिशिया के लोगों को उनका सम्मान वापस दिलाने के लिए बुअज़ीज़ी का शुक्रिया अदा किया.

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26 साल के मोहम्मद बुअज़ीज़ी अपने मोहल्ले में फलों के ठेले की जगह लॉरी लगाना चाहते थे जिसकी उन्हें सरकारी अधिकारियों से इजाज़त नहीं मिल रही थी.

उनके घरवालों के अनुसार वहाँ के तीन अधिकारी बुअज़ीज़ी से रिश्वत की मांग कर रहे थे. रिश्वत न देने पर उन अधिकारियों ने सामान ज़ब्त कर उनके साथ मारपीट की थी.

बुअज़ीज़ीजी इसकी शिकायत गवर्नर से करना चाहते थे लेकिन जब वो भी उनसे नहीं मिले तब उन्होंने हारकर ख़ुद को आग लगा ली थी.

यहीं से अरब क्रांति की मशाल जली जिससे ट्यूनीशिया के अलावा मिस्र, लीबिया और यमन में वर्षों से चल रही सरकारों का ना सिर्फ़ अंत हुआ बल्कि बदलाव की बयार भी बही.

इन देशों में हुए आंदोलनों का असर सीरिया में भी देखा जा रहा है जहां राष्ट्रपति बशर अल-असद के ख़िलाफ़ प्रदर्शन जारी हैं.

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