अब उत्तर कोरिया की राजनीति को लेकर चिंता

  • 19 दिसंबर 2011
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Image caption उत्तर कोरिया की अंदरूनी राजनीति की थाह कम ही मिल सकी

उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग इल की मौत के बाद ये चर्चा शुरु हो गई है कि उनका उत्तराधिकारी कौन होगा.

हालांकि उनके युवा बेटे किम जोंग उन के समर्थन के लिए देशवासियों से अपील की जा रही है.

उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए ने कहा है कि किम जोंग इल के बेटे किम जोंग-उन उत्तराधिकारी होंगे और वे उनके लिए समर्थन जुटाने में जुट जाएँ.

रूस-चीन-जापान की अपनी चिंताएँ

लेकिन इस बीच दक्षिण कोरिया ने सेना को सतर्क कर दिया है और आसपास के सारे देश उत्तर कोरिया के घटनाक्रम को चिंता के साथ देख रहे हैं.

ख़तरनाक स्थिति

किसी भी तानाशाही में उत्तराधिकार हमेशा एक ख़तरनाक क्षण होता है और जो चीज़ उत्तर कोरिया के लिए ख़तरनाक है वह उस इलाक़े के बाक़ी सभी देशों के लिए भी ख़तरनाक है.

किम जोंग इल का जीवन

क्या उत्तर कोरिया के नेता के घोषित उत्तराधिकारी किम जॉन्ग-उन अपना प्रभुत्व कायम कर पाएँगे?

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Image caption किम जोंग उन की राजनीतिक क्षमताओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं

ये हो सकता है कि सेना जैसे महत्वपूर्व सत्ता के केंद्र एक सामूहिक नेतृत्व की तरह काम करना चाहें और उत्तर कोरिया की दूसरी पार्टियाँ अपना प्रभाव बढ़ाने का प्रयास करें, ऐसे में उत्तर कोरिया का बाक़ी दुनिया के प्रति रवैया कैसा होगा?

प्योंगयॉन्ग की अंदरूनी राजनीति बहुत गोपनीय रही है और इसकी थाह बाहर से ले पाना कठिन रहा है.

लेकिन पिछले साल दक्षिण कोरियाई पोत का डुबोया जाना और दक्षिण कोरिया में गोलाबारी दोनों को पश्चिमी देशों ने उत्तरी कोरिया के राजनीतिक उथल पुथल और राजनीतिक बदलाव की भूमिका की तरह देखा था.

इसलिए आश्चर्य नहीं है कि अब दक्षिण कोरिया ने अपनी सेना को सतर्क कर दिया है.

कोरियाई प्रायद्वीप में जो कुछ होता है उसका बहुत महत्व है. न केवल दोनों कोरियाई देशों के लिए बल्कि अमरीका से रिश्तों के लिए भी क्योंकि अभी भी दक्षिण कोरिया में अमरीका की 30 हज़ार सैनिक मौजूद हैं.

किम जोंग उन के लिए समर्थन की अपील

ऐसा प्रतीत होता है कि वह काल अब ख़त्म हो गया जिसमें उत्तर कोरिया ने अमरीका से अपने संबंध सुधारने के प्रयास शुरु किए थे और अपने परमाणु कार्यक्रम के भविष्य को लेकर बातचीत शुरु की थी.

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ये चीन के लिए भी एक अहम मुद्दा है.

चीन अब भी उत्तर कोरिया का सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी है और पिछले एक साल में ये संबंध प्रगाढ़ हुए हैं.

हो सकता है कि उत्तर कोरिया की अंदरूनी राजनीति को प्रभावित करने में चीन ज़्यादा सफल न हो लेकिन उसकी आर्थिक सहायता उत्तर कोरिया के लिए अहम है जो अक्सर सूखे की चपेट में होता है.

जहाँ तक वहाँ प्रभाव का सवाल है तो अमरीका इसके लिए चीन की ओर ही देखेगा कि वह उत्तर कोरिया को कोई ख़तरनाक सैन्य क़दम उठाने से रोके.

मौत

किम जोंग इल की मौत शनिवार को उस समय हुई, जब वे ट्रेन से राजधानी प्योंगयांग से बाहर किसी इलाक़े का दौरा कर रहे थे.

ये भी बताया गया है कि ज़रूरत से ज़्यादा शारीरिक और मानसिक कार्यों के कारण उनकी मौत हुई.

हालाँकि बाद में केसीएनए ने ये जानकारी दी कि किम जोंग की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई.

किम जोंग इल का अंतिम संस्कार 28 दिसंबर को प्योंगयांग में होगा.

किम जोंग उन अंतिम संस्कार से जुड़ी समिति का नेतृत्व करेंगे. 17 से 29 दिसंबर तक के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है.

दुनिया भर से किम जोंग इल की मौत पर शोक संदेश आ रहे हैं.

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