लोकपाल बिल को कैबिनेट की हरी झंडी

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Image caption केंद्र सरकार पर लोकपाल बिल को संसद के इसी सत्र में पास कराने का दबाव है.

भारत के केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार रात लोकपाल विधेयक को मंज़ूरी दे दी है और उम्मीद की जा रही है कि अब ये विधेयक गुरूवार को संसद में पेश किया जाएगा.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ मंत्रिमंडल की बैठक में लोकपाल के जिस प्रारूप को मंज़ूरी मिली है उसमे कुछ एहतियातों के साथ प्रधानमंत्री के पद को इसके अधीन लाया जाएगा.

हालांकि अन्ना हज़ारे टीम के सदस्यों द्वारा उठाई गई केंद्रीय जांच ब्यूरो को लोकपाल के अधीन लाने वाली मांग को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस बिल के दायरे से बाहर ही रखा है.

साथ ही केंद्र सरकार ने ये भी फ़ैसला लिया है कि सीबीआई से उसके अभियोजन निदेशालय को अलग नहीं किया जाएगा.

मंत्रियों के एक समूह और अधिकारियों द्वारा दो दिन तक विधेयक के मसौदे पर चर्चा के बाद संविधान (संशोधन) विधेयक के नए मसौदे को मंगलवार रात करीब 70 मिनट तक चली मंत्रिमंडल की विशेष बैठक में मंजूरी दी गई.

पीटीआई के मुताबिक़ विधेयक गुरुवार को लोकसभा में पेश किया जाएगा और अगस्त में पेश किए जा चुके मौजूदा विधेयक को वापस ले लिया जाएगा.

दायरे में प्रधानमंत्री

कैबिनेट में पास किए गए नवीनतम विधेयक में प्रधानमंत्री को कुछ एहतियातों के साथ लोकपाल के दायरे में लाने का प्रावधान रखा गया है. इनमें अंतरराष्ट्रीय संबंध, सरकारी व्यवस्था, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, आंतरिक और बाहरी सुरक्षा जैसे विषयों को जांच के दायरे से बाहर रखे जाने का प्रस्ताव है. प्रधानमंत्री के ख़िलाफ किसी शिकायत पर जांच का फैसला पूरी पीठ करेगी जिसमें से कम से कम तीन-चौथाई सदस्यों की सहमति ज़रूरी होगी.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ यह जांच बंद कमरे में होगी और यदि शिकायत ख़ारिज की जाती है तो रिकार्ड सार्वजनिक नहीं किए जाएंगे. केंद्र की यूपीए सरकार लोकपाल विधेयक को पारित करने के लिए संसद के मौजूदा शीतकालीन सत्र को तीन दिनों के लिए बढ़ाने का फ़ैसला पहले ही कर चुकी है.

पहले शीतकालीन सत्र 22 दिसंबर तक चलने वाला था लेकिन अब इस सत्र में 27, 28 और 29 दिसंबर को भी संसद की बैठक होगी.

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