सीरिया में संघर्ष में '200 की मौत'

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Image caption सीरिया में गत मार्च से राष्ट्रपति बशर अल-असद के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हो रहे हैं

सीरिया में हिंसा की घटनाओं में हुई बढ़ोत्तरी के बाद पिछले दो दिनों में वहाँ क़रीब 200 लोगों की मौत हुई है.

दो कार्यकर्ता गुटों ने मंगलवार को हुई मौतों का आंकड़ा 84 बताया है. इनमें से ज़्यादा की मौतें उत्तर पश्चिमी प्रांत इदलिब में हुई हैं.

होम्स से जारी एक वीडियो में एक युवक के शव को दिखाया गया है जो गोलाबारी की वजह से दो टुकड़ों में विभाजित हो गया है.

हिंसा की ये घटनाएँ ऐसे समय में हुई हैं जब अरब लीग का प्रेक्षकों का एक गुट सीरिया में शांति प्रक्रिया की जायज़ा लेने के लिए सीरिया पहुँच रहा है.

संयुक्त राष्ट्र ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि मार्च में राष्ट्रपति बशर अल-असद के ख़िलाफ़ शुरु हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद से अब तक पाँच हज़ार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है.

जबकि सत्ता पक्ष का कहना है कि वह 'हथियारबंद चरमपंथी गिरोहों' से लड़ रहा है जो देश को अस्थिर करना चाहते हैं.

हिंसा में बढ़ोत्तरी

सोमवार को हुई हिंसा की घटना में देश भर में 110 लोगों के मारे जाने की ख़बरें थीं.

इनमें से 60-70 वो लोग थे जो सेना से विद्रोह करके अलग हो गए थे. इन लोगों को इदलिब प्रांत के एक गांव के पास गोली मार दी गई थी.

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वहाँ मंगलवार को नए सिरे से हिंसा हुई है और 25 विद्रोही सैनिक मशीनगन की गोलियों के शिकार बनाए गए.

इसके अलावा इदलिब प्रांत में 34 और होम्स में 14, ज़बादानी और ज़ेबेह में चार, हमा में तीन और दो दो डेरा और अलेपो में मारे गए हैं.

ऐसी अपुष्ट ख़बरें हैं कि सेना ने अपनी ताक़त का प्रदर्शन करते हुए कहा है कि वह किसी भी विदेशी आक्रमण से निपटने के लिए तैयार है.

ख़बरों के अनुसार सीरिया के वायुसेना और नौसेना ने हथियारों के परीक्षण किए हैं.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सीरिया में किसी विदेशी संवाददाता को काम करने की अनुमति नहीं है, लेकिन प्रदर्शनकारियों और एजेंसियों की ओर से जारी वीडियो और ख़बरों को देखकर लगता है कि वहाँ हिंसा में बढ़ोत्तरी हुई है.

शांति प्रक्रिया

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इस बीच सीरिया ने अरब लीग के प्रेक्षकों को देश की स्थिति का जायज़ा लेने की अनुमति दे दी है.

सीरिया के विदेश मंत्री वलीद अल मुआल्लिम ने कहा है कि देश की संप्रभुता सुरक्षित रहेगी क्योंकि अरब लीग ने समझौते में सुधार कर लिए हैं.

इस समझौते के अनुसार सरकार को सभी स्थानों से सेना को हटा लेना है.

उन्होंने कहा है कि अरब लीग के प्रेक्षक सरकार की सुरक्षा व्यवस्था में देश में कहीं भी जाने को स्वतंत्र होंगे.

लेकिन विपक्षी दलों के एक समूह ने सरकार के इस निर्णय की निंदा भी की है.

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि सरकार सेना को हटा लेती है तो कई स्थानों से उसका नियंत्रण ख़त्म हो जाएगा.

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