इतिहास के पन्नों में 23 दिसंबर

ब्रिटेन में निकारागुआ के राजदूत ने मदद की अपील की थी इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption ब्रिटेन में निकारागुआ के राजदूत ने मदद की अपील की थी

इतिहास में 23 दिसंबर के नाम दो भयंकर त्रासदियाँ दर्ज हैं-

1995- डबवाली आग दुर्घटना

भारत में हरियाणा के डबवाली नगर में एक स्कूल में आयोजित वार्षिक कार्यक्रम के दौरान तंबू में आग लगने से 400 से अधिक लोगों की मौत हो गई.

इस दुर्घटना में डेढ़ सौ से ज़्यादा लोग घायल भी हुए थे. उस समय वहाँ लगभग डेढ़ हज़ार लोग मौजूद थे और मारे गए लोगों में से काफ़ी बच्चे भी थे.

दरअसल आग लगने के बाद लोगों में भगदड़ मच गई और वहाँ से बाहर निकलने का एक ही रास्ता था. आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट बताई गई.

वहाँ आग बुझाने की भी कोई समुचित व्यवस्था नहीं थी और आग लगते ही तंबू में पूरी तरह फैल गई. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक़ आगे वाले लोग बच्चों के साथ पीछे भागने लगे जबकि पीछे वाले लोग आगे अपने बच्चों तक पहुँचने की कोशिश कर रहे थे.

इस दुर्घटना ने प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया और स्कूल प्रबंधन की भी जवाबदेही तय करने की कोशिश हुई.

1972- निकारागुआ में भूकंप से तबाही

निकारागुआ की राजधानी मनागुआ में दो घंटे तक चले भूकंप ने जनजीवन तहस-नहस कर दिया और लगभग दस हज़ार लोग मारे गए.

शुरुआती ख़बरों में तो ये पता चला कि पूरे के पूरे इलाक़े तबाह हो गए और तक़रीबन 80 फ़ीसदी इमारतें ध्वस्त हो गईं. इसके बाद किसी के भी वहाँ बचे मिलने की संभावना काफ़ी कम हो गई थी.

रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 6.5 मापी गई थी और उसकी वजह से कई इमारतों में आग लग गई. इसके बाद ये भी आशंका हो गई कि बचे हुए लोग शायद आग की भेंट चढ़ गए हों.

उसके बाद से टेलिफ़ोन लाइनें ठप हैं. राहतकर्मी इलाक़े की सफ़ाई में लग गए जिससे टायफ़ॉइड जैसी बीमारियाँ न पैल सकें और सैकड़ों बेघर लोगों तक खाना और पानी पहुँचाया जा सके.

शहर के तीन मुख्य अस्पताल भी खंडहर में बदल गए. राहतकर्मियों ने अस्थाई क़ब्रों में लोगों को दफ़नाना शुरू किया जिससे बदबू न फैले.

शहर को ख़ाली करने का आदेश जारी किया गया और अधिकारियों ने उस इलाक़े को बंद करने की घोषणा की जिससे वहाँ साफ़-सफ़ाई का काम हो सके.

वहाँ बाद तक भी कई हल्के झटके महसूस किए गए और सड़क में दरारें भी पाई गईं. अधिकारियों ने बताया कि उन्हें चिकित्सा सहायता और बेहोशी की दवा की काफ़ी ज़रूरत थी.

निकारागुआ के पड़ोसी देशों अमरीका और मैक्सिको ने उसे राहत सामग्री भेजी.

मनागुआ में इससे पहले 76 वर्षों में दो बार भूकंप आ चुका है जिसके बाद ये भी चर्चा गर्म हो गई थी कि देश की राजधानी बदली जा सकती है.

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