इतिहास के पन्नों में 25 दिसंबर

  • 25 दिसंबर 2011

इतिहास के पन्नों को पलटकर देखें तो विश्व प्रसिद्ध हास्य कलाकार चार्ली चैपलिन का निधन आज ही के दिन हुआ था. इसी दिन सोवियत संघ के नेता मिखाइल गोर्बाचोव ने भी अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

1977: चार्ली चैपलिन का निधन

Image caption चार्ली चैपलिन का शव उनकी क़ब्र से चुरा लिया गया था लेकिन बाद में वो ज़ब्त हो गया.

अदाकार-लेखक-निर्देशक-निर्माता-संगीतकार और नृत्य-निर्देशक चार्ली चैपलिन का निधन 25 दिसंबर को ही स्विट्ज़रलैंड में हो गया था.

तब उनकी उम्र 88 साल थी और वो अमरीका छोड़कर स्विट्ज़रलैंड जा बसे थे.

मृत्यु के समय उनकी पत्नी ऊना और चार्ली चैपलिन के आठ में से सात बच्चे उनके साथ थे.

समझा जाता है कि अपने चलचित्रों से फ़िल्मी दुनिया को नायाब फिल्में देने वाले विश्व प्रसिद्ध चार्ली चैपलिन की मौत नींद में ही हो गई.

उनका अंतिम संस्कार दो दिनों के बाद स्विट्ज़रलैंड में ही किया गया.

ब्रिटेन के प्रतिष्ठित सम्मान 'नाइटहुड' से नवाज़े गए चार्ली चैपलिन ने 80 फ़िल्मे बनाई थीं. उनकी फ़िल्मे एक ऐसी विरासत मानी जाती हैं जो अतुल्य है.

आधुनिक फ़िल्मों की नींव

साल 1914 में फिल्मी पर्दे पर पहली बार आए चार्ली चैपलिन अगले पांच दशकों तक फ़िल्में बनाने का काम करते रहे और माना जाता है कि उनके चलचित्रों ने आधुनिक फ़िल्मों की नींव डालने का काम किया था.

चार्ली चैपलिन का जन्म ग़रीबी में हुआ था और उनके माता-पिता का संबंध मनोरंजन जगत से था. चैपलिन के जन्म के बाद उनके माता-पिता अगल हो गए थे.

उन्होंने पांच साल की उम्र से ही अदाकारी करना शुरू कर दिया था. साल 1910 में वो अमरीका चले गए.

वहां उन्होंने 1914 में अपनी पहली फ़िल्म 'किड्स ऑटो रेसेज़' बनाई जिसमें दर्शकों का परिचय 'लिटिल ट्रैंप' के किरदार से हुआ.

उस फ़िल्म के बाद, पांव घसीटकर चलने और छड़ी घुमाने वाला, लिटिल ट्रैंप, जो बड़े आकार की पैंट पहनता था और काली मूछें रखता था, लोगों के दिल पर छा गया.

शीत युद्ध के दौरान साम्यवादी विचारधारा की ओर उनके झुकाव के कारण अमरीका में उनका रहना मुश्किल हो गया.

बीस साल बाद उन्हें ऑस्कर से भी नवाज़ा गया लेकिन उन्होंने अपने जीवन के आखिरी दिन स्विट्ज़रलैंड में ही बिताए.

1991: मिखाइल गोर्बाचेव का इस्तीफ़ा

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Image caption मिखाइल गोर्बाचोव ने इस्तीफ़े की घोषणा टीवी पर की थी.

लगभग सात साल तक सोवियत संघ के नेता के पद पर बने रहे मिखाइल गोर्बाचेव ने सोवियत संघ के विघटन के बाद आज के दिन ही अपने त्यागपत्र की घोषणा की थी.

सोवियत संघ के विघटन के बाद पूर्व सोवियत देशों के राष्ट्रमंडल का गठन हुआ.

सोवियत नेता ने इस्तीफ़े की घोषणा टेलीविजन पर की.

उन्होंने कहा, "पू्र्व सोवियत संघ के राष्ट्रमंडल देशों के गठन से जो स्थिति उभरी है उसकी वजह से मैं सोवियत संघ के राष्ट्रपति के तौर पर अपनी गतिविधियों पर रोक लगा रहा हूं."

अपनी उपलब्धियां गिनवाते हुए कहा उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में निष्पक्ष चुनाव एक सच्चाई साबित हुए. एक स्वतंत्र प्रेस, धर्म की स्वतंत्रता और एक बहुदलीय राजनीतिक व्यवस्था सोवियत संघ में स्थापित किया जा सका.

उन्होंने माना कि कुछ गलतियां हुई थी. उन्होंने लोगों को शुभकामनाएं दीं.

गोर्बाचोव के इस्तीफ़े के बाद देश के परमाणु हथियारों के ज़ख़ीरे का ज़िम्मा रूस के प्रधानमंत्री बोरिस येल्तसिन के हाथों में चला गया.

जल्द ही हथौड़े और हसिंया वाला सोवियत संघ का झंड़ा उतारकर उसकी जगह रूस के तिरंगे झेंडे को फहराया गया.

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