दुनिया में शांति स्थापित हो: पोप

पोप बेनेडिक्ट
Image caption क्रिसमस के मौके पर दुनियाभर के ईसाईयों को अपना संदेश सुनाते पोप बेनेडिक्ट सोलह

दुनिया भर के रोमन कैथोलिक ईसाईयों के सर्वोच्च धार्मिक गुरू पोप बेनेडिक्ट सोलहवें ने हर साल क्रिसमस के अवसर पर दिए जाने वाले अपने पारंपरिक संदेश में, सीरिया में चल रही हिंसा को जल्द ख़त्म होने के लिए प्रार्थना की.

पोप बेनेडिक्ट सोलहवें ने अपनी प्रार्थना में कहा, ''ईश्वर जल्द से जल्द सीरिया में चल रही हिंसा को ख़त्म करे जिसमें काफ़ी ख़ून बह चुका है''.

उन्होंने दुनिया के देशों से अपील की कि वे उत्तरी अफ़्रीक़ा के सूखाग्रस्त इलाक़ों में रह रहे लोगों की मदद करें.

पोप बेनेडिक्ट सोलहवें का संदेश 65 भाषाओं में इंग्लैंड समेत दुनियाभर के कई अन्य देशों में प्रसारित किया गया.

क्रिसमस की पूर्व संध्या पर शनिवार को आयोजित क्रिसमस की धार्मिक संगीत सभा में ईसाईयों के धर्मगुरु ने इस त्यौहार के व्यवसायीकरण की तीख़ी आलोचना की.

उन्होंने भक्तों से आग्रह किया कि वे इस बाहरी चमक-दमक से प्रभावित ना हों.

बंटी हुई दुनिया

सेंट पीटर्स स्क्वायर से इतालवी भाषा में दिए गए अपने संबोधन में पोप बेनेडिक्ट सोलहवें ने ख़ासतौर पर दुनिया में चल रही लड़ाइयों का विरोध किया.

उन्होंने कहा, '' ईश्वर कई भागों में बंटी इस दुनिया को राहत दे, जो अब भी कई तरह की लड़ाइयों से लहूलुहान हो रहा है''.

शनिवार को ही सीरिया की राजधानी दमिश्क में हुए एक आत्मघाती हमले में 44 लोगों की मौत हो गई थी और 150 लोग घायल हुए थे.

उत्तरी-अफ़्रीक़ा और मध्य-पूर्व के देशों में हुई अरब क्रांति की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इन देशों के नागरिक दोगुनी ताक़त से सामाजिक बेहतरी के लिए आगे आएं.

पोप ने इसराइलियों और फ़लस्तीनियों के अलावा दक्षिणी सूडान और अफ़्रीक़ी देशों के बीच बेहतर तालमेल की मांग की.

उन्होंने बर्मा में भी वार्ता शुरु करने की इच्छा जताने के साथ-साथ थाइलैंड और फ़िलीपींस के अकाल पीड़ितों के लिए भी प्रार्थणा की.

पोप के अनुसार ईसा-मसीह ने पूरी दुनिया में शांति और सामंजस्य का संदेश दिया.

समय में फेरबदल

84 वर्षीय पोप बेनेडिक्ट सोलहवें के गिरते सेहत को देखते हुए इस साल क्रिसमस की धार्मिक सभा अपने नियत समय से दो घंटे पहले शुरु हो गई थी.

हालांकि बीबीसी संवाददाता एलन जॉन्सटन के अनुसार शारीरिक रुप से कमज़ोर होने के बावजूद पोप बेनेडिक्ट सोलहवें ने काफ़ी ठोस संदेश दिया.

उन्होंने भक्तों से अपने त्यौहार का केंद्र ईसा-मसीह के जन्म से जोड़कर रखने को कहा ताकि उन्हें सच्ची ख़ुशी मिल सके. उन्होंने ग़रीबों के लिए प्रार्थणा और अत्याचारियों की निंदा की.

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