प्रसिद्ध नाटककार सत्यदेव दुबे नहीं रहे..

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Image caption सत्यदेव दुबे एक महान रंगकर्मी थे और थियेटर उनकी ज़िंदगी थी.

प्रसिद्ध निर्देशक, अभिनेता और पटकथा लेखक सत्यदेव दुबे का रविवार सुबह मुंबई के एक अस्पताल में निधन हो गया है.

75 वर्षीय सत्यदेव दूबे लंबे समय से बीमार थे और पिछले कुछ महीनों से कोमा में थे. अस्पताल में मौजूद उनके एक रिश्तेदार के अनुसार सत्यदेव दुबे को रविवार सुबह मस्तिष्क आघात पहुंचा जिसके बाद उनकी मृत्यु हो गई.

70 और 80 के दशक के काफी अनुभवी नाटककार और निर्देशक रह चुके सत्यदेव दुबे को इसी साल सितंबर महीने में पृथ्वी थियेटर में चल रहे एक कार्यक्रम के दौरान दौरा पड़ा था जिसके बाद वे कोमा में चले गए थे. पिछले कुछ सालों से दुबे की तबियत लगातार ख़राब चल रही थी और वो काफी कमज़ोर हो गए थे. वो ज़्यादातर समय अस्पताल में बीत रहा था.

मुंबई को बनायी कर्मभूमि

सत्यदेव दुबे का जन्म छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हुआ था, लेकिन बाद में उन्होंने मुंबई को अपना घर और कर्मभूमि बना लिया. मराठी थियेटर में किए गए उनके काम ने उन्हें काफी ख्य़ाति दिलाई. इतना ही नहीं सत्यदेव दुबे को मराठी और हिंदी थियेटर में किए गए उनके व्यापक काम के लिए पद्मभूषण भी दिया गया था.

अपने लंबे कार्यकाल के दौरान सत्यदेव दुबे ने आज़ादी के बाद लिखे गए सभी प्रमुख नाटकों का निर्देशन और प्रस्तुतिकरण किया था.

उनके द्वारा प्रस्तुत किए प्रमुख नाटकों में गिरीश कर्नाड की 'यायाति और हैयावदाना', बादल सरकार की 'इवाम इंद्रजीत और पगला घोड़ा', चंद्रशेखर कंबारा की 'और तोता बोला', मोहन राकेश की 'आधे-अधूरे', विजय तेंदूलकर 'गिदहड़े, शांता और कोर्ट चालू आहे' शामिल हैं.

सत्यदेव दुबे ने श्याम बेनेगल की फिल्म 'भूमिका' के अलावा कुछ अन्य फिल्मों के लिए भी कहानी और डायलॉग लिखे थे.

उनके द्वारा चलाए जाने वाले थियेटर कार्यशाला को पेशेवर और शौकिया तौर पर थियेटर करने वाले लोग एक समान पसंद किया करते थे.

फिल्म निर्देशक महेश भट्ट ने ट्विटर में लिखे अपने संदेश में दुबे की मौत पर दुख जताते हुए कहा है कि, ''उनके साथ बिताए गए वक्त उन्हें हमेशा सत्यदेव दूबे की याद दिलाते रहेंगे.''

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