सीरिया ने '755 बंधकों को रिहा' किया

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Image caption सीरिया में विद्रोह के दौरान हिरासत में लिए 755 लोगों को रिहा कर दिया है.

सीरिया में सरकारी टेलीवीज़न के मुताबिक राष्ट्रपति बशर-अल-असद के खिलाफ़ पिछले नौ महीने से चल रहे विद्रोह के दौरान हिरासत में लिए गए 755 लोगों को रिहा कर दिया गया है.

एक रिपोर्ट के मुताबिक रिहा किए गए लोग 'हाल में हुई विद्रोही घटनाओं' में शामिल थे लेकिन वे किसी खूनी वारदात का हिस्सा नहीं थे. नवंबर महीने में भी सीरिया सरकार का दावा था कि उसने 1180 कैदियों को छोड़ा था.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि जेल में बंद सभी लोगों को अरब लीग की शांति योजना के तहत रिहा किया जाना चाहिए.

इससे पहले सीरिया आए अरब लीग के पर्यावेक्षकों ने होम्स में हालात को आश्वस्त करने वाला बताया था. हालांकि रिपोर्टें आ रही थीं कि सुरक्षाबलों ने मंगलवार को प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए गोलीबारी की.

'धोखा'

दिसंबर महीने की शुरुआत में संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त नवी पिल्लई ने कहा था कि विद्रोह को दबाने के अभियान में हज़ारों लोगों को गिरफ्तार किया गया था और करीब 14 हज़ार लोगों को हिरासत में रखा गया था.नवी पिल्लई के अनुसार उनके पास इस बात के सबूत हैं कि सीरिया की सेना मानवता के खिलाफ़ अपराध में शामिल है.

मानवधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि कम से कम 40 हज़ार लोगों को रोक कर रखा गया है.

मंगलवार को मानवाधिकार पर्यवेक्षकों ने सीरिया के अधिकारियों पर आरोप लगाया था कि उन्होंने हिरासत में लिए गए सैंकड़ों बंदियों को सैन्य ठिकानों में छुपा कर रखा है जहां पर्यवेक्षकों के जाने पर रोक थी.

लेबनान में बीबीसी संवाददाता जिम मुइर के अनुसार बंदियों को रिहा करने के सीरिया सरकार की घोषणा ये साबित करने के लिए काफ़ी नहीं कि वे अरब लीग के साथ सहयोग कर रहे हैं.

अरब लीग के पर्यवेक्षकों ने बुधवार को अशांत माने वाले इलाकों होम्स, इदलीब और दियरा का दौरा किया था.

मंगलवार को सीरियाई फौज ने पर्यवेक्षकों के पहुंचने से पहले होम्स शहर में सख्त़ी कम भी की थी, लेकिन इस दौरान जब प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए तब उन्हें रोकने के लिए आंसू गैस के गोले और गोलियां दागी गई.

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सिर्फ मंगलवार को ही सीरिया में कुल 16 लोग मारे गए थे, जबकि दूसरा गुट इसे 42 बताता है.

इन सब के बावजूद पर्यवेक्षक दल के नेता जनरल मुस्तफ़ा-अल-दाबी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि वहां के हालात चिंतित करने वाले नहीं है.

बीबीसी संवाददाता के अनुसार जनरल दाबी अपनी राय खुलकर ज़ाहिर नहीं कर रहे हैं, क्योंकि अरब लीग के इस छोटे से पर्यवेक्षक दल के लिए ये मुमकिन नहीं है कि वे सीरिया जैसे बड़े देश में हो रही हर छोटी घटना पर नज़र रख सके.

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