क़त्ल का दोषी है सबसे प्रसिद्ध जल्लाद

  • 31 दिसंबर 2011
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Image caption बांग्लादेश में भले ही कई जल्लाद हैं लेकिन मियां को सबसे प्रसिद्ध माना जाता है.

मशहूर होने के लिए यह तरीका थोड़ा अटपटा लग सकता है लेकिन बबुल मियां बांग्लादेश के सबसे प्रसिद्ध जल्लाद हैं.

बबुल मियां को क़त्ल के जुर्म में उम्रकैद की सज़ा दी गई थी लेकिन उन्हें अच्छे आचरण और जेल में जल्लाद का काम करने के लिए जल्दी छोड़ दिया गया है. उन्होंने जेल में 17 लोगों को फ़ांसी दी.

22 वर्ष जेल में बिताने के बाद पिछले साल मियां उत्तरी बांग्लादेश में नागोर गाँव में अपने घर वापिस आए.

बांग्लादेश में भले ही कई जल्लाद हैं लेकिन मियां को सबसे प्रसिद्ध माना जाता है.

बांग्लादेश में सभी जल्लाद क़ैदी हैं या पूर्व दोषी हैं जिन्हें इस काम के लिए जेल में प्रशिक्षण दिया जाता है.

नागेर जैसे खूबसूरत गाँव में मियां अपने परिवार और दोस्तों के साथ दोबारा से ज़िंदगी की शुरूआत करने का प्रयास कर रहे हैं.

साल 1989 में जब उन्हें क़त्ल के लिए जेल भेजा गया तो वह 17 वर्ष के थे. उनका कहना है कि वो क़त्ल उन्होंने नहीं किया था.

क्यों बने जल्लाद

बबुल मियां कहते हैं, ''मैं अपनी मर्ज़ी के खिलाफ़ जल्लाद बना. जेल में मुझे अधिकारायों ने कहा कि अगर मैं जल्लाद बनूँ तो मेरी सज़ा हर फाँसी के बदले दो महीने कम होती रहेगी.''

उन्होंने कहा, ''मैं जेल से जल्दी बाहर आना चाहता था. इसलिए मैंने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया.''

बांग्लादेश उन देशों में से है जहाँ मौत की सज़ा फांसी के रूप में दी जाती है.

साल 1971 में पाकिस्तान से आज़ादी हासिल करने से अब तक 400 से ज़्यादा लोगों को फांसी दी गई है. अधिकारियों का कहना है कि 1,000 से अधिक कैदी मौत की सज़ा का इंतज़ार कर रहे हैं.

जेलों में भीडभाड़ कम करने के प्रयास के तहत जिन 1,000 से ज़्यादा कैदियों को पिछले साल छोड़ा गया था उनमें मियां भी थे.

मियां के लिए दो दशकों के बाद रिहाई पुनर्जन्म की तरह थी.

उन्होंने कहा, ''जब मैं अपने गाँव पहुँचा तो सब कुछ बदल चुका था. मैं अपने लोगों को नहीं पहचान पाया और न ही वो मुझे पहचान पाए.''

पहले डरती थीं पत्नी

अपने गाँव पहुँचने के तुरंत बाद ही बबुल मियां ने एक स्थानीय लड़की मुसम्मत कोबिता अख़्तर से विवाह कर लिया. दम्पति के घर अब बच्चे का जन्म होने वाला है.

बिना किसी स्थाई काम के मियां अपने भाई के खेत में काम कर और उनके पशु की देखभाल कर अपना गुज़ारा करते हैं.

कभी कभी वह पड़ोसी गाँवो में दिहाड़ी पर मज़दूरी करते हैं. वह पाँच हज़ार टका यानि लगभग 3,500 रुपए प्रति महीना कमाते हैं.

उन्होंने कहा, ''बहुत सारे लोगों ने मुझे नौकरी देने का या अपना व्यापार शुरू करने का वायदा किया लेकिन कुछ नहीं हुआ. पिछले 20 सालों में महँगाई बहुत बढ़ चुकी है. मुझे नहीं पता कि मैं इतनी कम आमदन में कैसे गुज़ारा करूँगा.''

बबुल मियां की पत्नी ने कहा कि पहले वह इतने सारे लोगों को फांसी देने वाले व्यक्ति के साथ रहने से डरती थीं.

उन्होंने कहा, ''बाद में मुझे एहसास हुआ कि वह निर्दोष हैं और जेल में केवल अपना कार्य कर रहे थे. अब वह भविष्य के बारे में बात करते हैं. वह हमारे बच्चों को अच्छी शिक्षा देना चाहते हैं ताकि उन्हें उनकी तरह मुश्किलों का सामना न करना पडे़.''

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