इतिहास के पन्नों में 31 दिसंबर

इतिहास के पन्ने पलटें तो 31 दिसंबर को ही वर्ष 1600 में ईस्ट इंडिया कंपनी को पंजीकृत किया गया था और इसी दिन साल 1964 में डोनल्ड कैम्पबेल ने पानी और ज़मीन पर सबसे तेज़ गति से वाहन चलाने का रिकॉर्ड बनाया था.

1600: ईस्ट इंडिया कंपनी का पंजीकरण

Image caption ईस्ट इंडिया कंपनी के पंजीयन के लिए महारानी ने शाही फ़रमान जारी किया था.

पूर्वी, दक्षिण-पूर्वी एशिया और ख़ास तौर पर भारत के साथ व्यापार के लिए 31 दिसंबर, 1600, को ब्रिटेन की महारानी एलिज़ाबेथ प्रथम ने शाही फ़रमान जारी करते हुए ईस्ट इंडिया कंपनी को पंजीकृत किए जाने के आदेश जारी किए थे.

कंपनी को मसाले के व्यापार के लिए गठित किया गया था जिसमें उस दौर में स्पेन और पुर्तगाल का एकाधिपत्य था.

समय के साथ कंपनी ने मसाले के अलावा कपास, रेशम, चाय, नील और अफ़ीम के व्यापार का काम भी शुरू कर दिया था.

शुरुआती दशकों में पूर्वी एशिया में अपना व्यापार बढ़ाने के बाद ब्रितानी सरकार की मदद से ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत और चीन में अपनी पैठ जमानी शुरू की.

कंपनी को अपने व्यापार में एकाधिकार था और समय के साथ उसने राजनीतिक गतिविधियों में हस्तक्षेप करना शुरू किया. एक लंबे समय तक वो ब्रितानी सरकार के एजेंट के तौर पर भारत में काम करती रही.

लेकिन 1857 में भारतीय सेना के विद्रोह के बाद इस कंपनी को पहली जनवरी 1874 को भंग कर दिया गया और ब्रितानी सरकार ने भारत के संचालन का काम सीधा अपने हाथों में ले लिया.

1964: पानी और ज़मीन पर तेज़ गति का रिकॉर्ड

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Image caption अपना पूराना रिकॉर्ड तोड़ने के प्रयास में डोनल्स कैम्पबेल की मौत हो गई थी.

वर्ष 1964 में 31 दिसंबर को डोनल्ड कैम्पबेल ने अपनी स्पीडबोट 444.71 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ़्तार से दौड़ाई और उस वर्ष का दुनिया में पानी पर सबसे तेज़ गति से चलने का रिकॉर्ड तोड़ दिया.

एक ही वर्ष में पानी और ज़मीन पर सबसे तेज़ गति से वाहन दौड़ाने का रिकॉर्ड बनाने वाले वो पहले शख़्स थे.

इसी वर्ष जुलाई में उन्होंने ज़मीन पर 648.72 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ़्तार से गाड़ी चलाई थी.

इससे पहले पानी पर सबसे तेज़ गति से स्पीडबोट चलाने का रिकॉर्ड भी उन्होंने ही बनाया था. साल 1959 में कैम्पबेल ने अपनी स्पीडबोट 418.99 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ़्तार से दौड़ाई थी.

इसके बाद वर्ष 1967 में उन्होंने अपना रिकॉर्ड फिर तोड़ने की कोशिश की. लेकिन जैसे ही उनकी स्पीडबोट ने 483 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ़्तार पार की उसका संतुलन बिगड़ गया.

स्पीडबोट हवा में उछली और पानी पर गिरते ही ध्वस्त हो गई. डोनल्ड कैम्पबेल की मौके पर ही मौत हो गई. वो 46 वर्ष के थे.

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